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मुद्रा 2015-16
उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशालायें

उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशालाओं की स्थापना एवं उनकी कार्य प्रणाली

स्थापना/उद्देश्य :-
  • उर्वरक विभिन्न फसलों के उत्पादन में प्रमुख आदान है। उर्वरकों की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए उर्वरक को आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत रखा गया है । उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 के अंतर्गत प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई है

कार्यस्थल :- 
  • सबसे पुरानी उर्वरक प्रयोगशाला जबलपुर में स्थापित की गई बाद में ग्वालियर, इन्दौर एवं भोपाल में भी उर्वरक प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई।

अमाला :- 
  • सहायक रसायन विशेषज्ञ अधिकारी प्रयोगशाला के प्रभारी रहते हेै एसएडीओ स्तर के 4 अधिकारी जो विश्लेषक के पदों पर नत्रजन, स्फुर, पोटाश विश्लेषण का कार्य करते हैं, एक एकाउन्टेन्ट एक सहायक ग्रेड-3 एव् ां एक भृत्य, एक प्रयोगशाला परिचालक के पद भी सवीकृत है एवं उन पदों पर कर्मचारी कार्य कर रहे है ।

बजट :-
  • ग्लाय वेयर एवं रसायन खरीदी हेतु प्रति प्रयोगशाला अनुमानित 2.00 लाख रू  पयों का आवंटन तथा अमले के वेतन हेतु अनुमानित 7.00 लाख का आवंटन दिया जाता है ।

उर्वरक नमूने :- 
  • प्रति प्रयोगशाला अनुमानित 1200 नमूने वर्ष में जांच ह ेतु प्राप्त होते है । नमूनों में प्रमुखत: यूरिया, डीएपी, 12:32:16 पोटाश, सीएएन 15:15:15, एसएसपी आदि उर्वरकों के नमूने जिले के उर्वरक निरीक्षकों स े उप संचालक कृषि के माध्यम से संबंधित उर्वर क गुण नियंत्रण प्रयोगशाला को भेजा जाता है । नमूना लेने समय 'पी' फार्म करना होता है । तीन थैलियों में नमूना लिया जाता है । एक प्रयोगशाला को एक विक्रेता की दुकान#सोसाईटी में रखी जाती है, एक थैली गार्ड नमूना की उप संचालक कृषि कार्यालय में रखी जाती है, 7 दिवस के अंदर उर्वरक नमूना प्रयोगशाला में भेजने का बंधन एफ.सी.ओ. में दिया गय् ाा ह ै । प्रयोगशाला परीक्षण कर उर्वरक नमूनों के परिणाम प्रपत्र एल.4 में 60 दिनों के भीतर संबंधित उप संचालक कृषि को भेज दिया जाता है । अमानक परिणाम की दशा में उप संचालक कृषि स्तर से एफ.सी. ओ. को धाराओं की तहत प्रकरण पंजीबध्द होकर फैसला होता है ।

प्रयोगशालावार उर्वरक नमूनों का वितरण :-  
संयुक्त संचालक कृषि (प्रयोगशाला) :-
  • समस्त 4 प्रयोगशालाओं को संचालनालय स्तरपर समस्त संयुक्त संचालक कृषि उर्वरक, नियंत्रण एवं रिपोर्ट आदि रखते है ।

रिपोर्ट संकलन   :- 
  • ए.सी.एस. जबलपुर, इन्दौर, ग्वालियर एवं भोपाल द्वारा प्रपत्र ''एल'' में उर्वरक विश्लेषण रिपोर्ट संबंधित जिलों को भेजी जाती है । संचालनालय स्तर पर संयुक्त संचालक कृषि (फर्टि.) द्वारा साप्ताहिक गोस वारा, कम्पनीवार, उर्वरकवार, जिलेवार मानक अथवा अमानकवार बनाया जाकर शासन को प्रति मंगलवार भेजकर समीक्षा करायी जाती है । इससे अमानक स्तर पर उर्वरक बनाने वाली अथवा प्रदाय करने वाली कम्प् ानियों परनिगरानी रखी जाकर कृषकों को उत्तम गुणवत्ता वाला उर्वरक वितरण में प्रयोगशाला चेक प्वाइंट का कार्य करती रहती है ।


M.P. Krishi
 
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