फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - तिल

आई. पी. एम

  • गहरी जुताई करें जिससे कीड़े,सूत्रकृमि,रोग कारक,परजीवी इत्यादि नष्ट हो जाए और पिछली फसल के अवशेषों को नष्ट करें।
  • प्रतिरोधक किस्मों के प्रमाणित,अम्ल उपचारित बीजों का उपयोग करें।
  • खेत की तैयारी, बीज दर, उर्वरक एवं सिंचाई के प्रंबधन के लिए प्रचलित सस्य विधियां को अपनाए।
  • कददू व आलू सजातीय फसलों को आसपास न उगाए।
  • एकवर्ती फसल प्रणाली न अपनाए।
  • कपास को नींबू जाति के पौधे के साथ नहीं उगाना चाहिए जिससे कपास को सी एल सी वी रोग से बचाया जा सके।
  • कपास की बोनी के 8-9 सप्ताह तक फसल को नींदा मुक्त जुताई और हाथ से उखाड़ कर रखना चाहिए या ऐलाक्लोर 2-2.5 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर या ट्राईफ्लूरीन 0.9-1.2 कि.ग्रा. का छिड़काव करें।
  • इमीडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यू.एस. 5 से 10 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से या 20 डी. एस. कार्बोसल्फान 2 ग्राम प्रति किलो की दर से उपचारित करें।
  • सड़न और विल्ट से बचाव के लिए ट्राईकोडर्मा विरिडी, टी.हज़ारियम या ग्लोक्लेडियम वायरेन्स 4 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करें।
  • डेडू छेदक इल्ली और विल्ट के आक्रमण के रोकने के लिए कपास को मूंग,सोयाबीन, रागी,मक्का,अरहर या प्याज के साथ उगाए।
  • फसल के चारों तरफ मेढों पर कीट रोधी बाढ लगानी चाहिए जैसे मक्का, चना आदि लगाना चाहिए।
  • रस चूसने वाले कीट से वचाव के लिए 5 प्रतिशत नीमसत का छिड़काव करें।
  • कीटों की विभिन्न अवस्थाओं के प्रारंभ में ही हाथों से उखाड़ कर नष्ट कर दे।
  • परभक्षी पक्षियों के बैठने के लिए आवश्यक संख्या में शाखा वाले बांस अथवा अन्य लकड़ियां गाड़े ताकि पक्षी उनपर बैठे और कीटों को पकड़कर खाये।
  • ट्राइकोग्रामा चिलोनिस अण्ड परजीवी के अण्डे 1.5 लाख प्रति हेक्टेयर और 50000 प्रति हेक्टेयर की दर से कीटों को देखते ही फसल पर छोडें।
  • आखिरी चुनाई बाद फसल के पूर्व अवशेष निकाल कर नष्ट कर दे।
  • छेदक कीटों के लिए फेरोमेन प्रपंच (5 प्रपंच प्रति हेक्टर) का उपयोग करें ।
  • फसल अवद्दि को न बढाये ।
  • खेतों के पास चुनी कपास एंव कपास के डंठलों को न रखें ।