फसल सिफारिशें
खरीफ फसल - कुटकी

उर्वरक प्रबंधन

  • 3 साल में एक बार 5 टन प्रति हेक्टर अच्छी तरह से सड़ी हुई खाद का उपयोग करें। जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे।
  • खाद का उपयोग बुआई के 2 से 3 सप्ताह पूर्व करें।
  • रसायनिक उर्वरकों 20 कि.ग्रा. नत्रजन तथा 20 कि.ग्रा. फास्फोरस प्रति हेक्टेयर की दर से करें।
  • जिन क्षेत्रों में पोटाश की कमी हो उनमें 20 कि.ग्रा. पोटाश / हे के रूप में बेसल दें।
  • जिन क्षेत्रों में सामान्य वर्षा होती है उन में नत्रजन बुआई के समय दें।
  • िक वर्षा के क्षेत्र में नत्रजन दो हिस्सों में दे पहली बुआई के समय और दूसरी बोनी के 35-40 दिन बाद दें।

सिंचाई प्रबंधन

  • कुटकी एक असिंचित फसल की तरह उगाई जाती है।
  • यह खरीफ मौसम में उगाई जाती है और इसे सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती।
  • यदि मिट्टी में पर्याप्त नमी न हो और सिंचाई उपलब्ध हो तो कल्ले बनते समय सिंचाई करें।

अन्तर सस्य क्रियायें

  • अच्छी उपज के लिए अन्तरसस्य क्रियायें जैसे रिक्त स्थान भरना, खरपतवार नष्ट करना, जल निकास की व्यवस्था करना आदि करना चाहिए।
  • अगर खरपतवार का ज्यादा आक्रमण हो तो खरपतवार उखाड़कर नष्ट करें।
  • अगर खेत में पानी भरा हो तो जल निकास का व्यवस्था करें।

पोषण विकृति

  • जानकारी उपलब्ध नहीं है|