फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - सोयाबीन

आई. पी. एम

  • बुआई के पूर्व पंक्ति दूरी ( 20 से.मी. और अधिकतम बीज दर ( 125 कि.ग्रा/हे और आक्साडाईज़ोन 1 कि. ग्रा. सू्र्यीकरण हल्की सिंचाई के बाद खेत को पोलीथीन से ढंकते है जिससे पानी वाष्प बनकर खरपतबार खत्म करता है।

कीट प्रंबधन :-

  • गर्मी के मौसम में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करना चाहिए।
  • मानसून के पहले बोनी न करें।
  • नाईट्रोजनित उर्वरकों का उपयोग उपयुक्त मात्रा में करें।
  • पोटाश उर्वरकों का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतबार उखाड़कर नष्ट कर देना चाहिए।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अरहर या मक्का या ज्वार के साथ 4:2 मे अन्तरवर्तीय फसलों के रूप में उगाना चाहिए।

रोग प्रंबधन :-

  • प्रतिरोधित किस्मों का उपयोग करना चाहिए।
  • रोग रहित बीजों का उपयोग करना चाहिए।
  • सोयाबीन के बाद या पहले रोग संवेदी फसलों को नहीं लगाना चाहिए।
  • जुताई के समय फसल के अवशेषों को पूरी तरह हटाना चाहिए।
  • पत्तों के गीले होने पर खेत में सस्य कार्य नहीं करना चाहिए।
  • पिछले साल के रोग ग्रसित ठूँठों को नष्ट करना चाहिए।