फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - सोयाबीन

कीट प्रबंधन - सोयाबीन

कीट मेलेनाग्रोमाईज़ा सोजे
प्रचलित नाम तना मक्खी
क्षति
  • यह फोटो सोयाबीन की तना मक्खी की है।
  • सोयाबीन का प्रमुख कीट है और 20-30 प्रतिशत तक हानि पहुंचाता है।
  • यह कीट पत्तों पर अंडे देता है।
  • अंडे से मेंगट निकलने पर वह सबसे निकटतम कोशिका को छेदती है।
  • मेंगट उसके बाद तने को छेदती है।
  • यदि संक्रमित तने को खोला जाए तो उसमें टेढ़ी-मेढ़ी लाल सुंरगे, मेंगट, प्यूपा देखे जा सकते है।
  • मेंगट तने की बाहरी परत पर पलते है और जड़ों तक को खा सकते है जिससे पौधा मर जाता है।
  • फूल और फल्ली बनने की अवस्था में आक्रमण करता है।
आई.पी. एम.
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में जैसे जे.एस-335, पी.के. 262, एन.आर.सी. 12, एम.ऐ.सी.एस. 124 को उगायें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • अनुमोदित बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
  • रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड देखे।
  • फसल चक्र अपनाइये।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले। निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक का उपयोग करें-:
  • बोनी से पहले कार्बोफूरान 3 जी. को 30 कि.ग्रा / हे की दर से या क्षारीय फोरेट 10 जी. की दर से 10 कि.ग्रा /हे का भुरकाव करे।
  • आक्सीमीटन मिथाईल 25 प्रतिशत ई.सी. 500 मि.लि. /हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • अंकुरण के दो सप्ताह के बाद डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. 750 मि.लि./हे 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफॉस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • 25 ई.सी. क्वीनालफॉस 1000 मि.ली./हे की दर से छिड़काव करें।
कीट लेप्रोसिमा इडिकेटा
प्रचलित नाम पत्ता मोडक ( लीफ फोल्डर )
क्षति
  • लार्वा पहले पत्तियों को खाती है।
  • ये मिसोफाइल को खाते है।
  • ये परतों के अन्दर रहते है।
  • संक्रमण अधिक होने पर दूर से देखने पर खेत जले हुए से प्रतीत होते हैं।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में जैसे एच. आर. एम. एस. ओ. 1564 का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए अगर मिट्टी में पोटॉश की कमी हो तो।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
  • रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड देखे।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले। निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक का उपयोग करें-:
  • बोनी से पहले कार्बोफूरान 3 जी. को 30 कि.ग्रा / हे की दर से या क्षारीय फोरेट 10 जी. की दर से 10 कि.ग्रा /हे का भुरकाव करे।
  • आक्सीमीटन मिथाईल 25 प्रतिशत ई.सी. 500 मि.लि. /हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • अंकुरण के दो सप्ताह के बाद डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई.सी. 750 मि.लि./हे 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफॉस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से 600-800 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
  • 25 ई.सी. क्वीनालफॉस 1000 मि.ली./हे की दर से छिड़काव करें।
कीट डेक्टीस टेकसान्स टेकसान्स
प्रचलित नाम तनाछेदक
क्षति
  • इल्ली ज्यादा क्षति पहुँचाते है।
  • सोयाबीन की शीध पकने वाली किस्में इस कीट से ज्यादा प्रभावित होती है।
  • लार्वा तने के बीच में सुंरग बना कर तने को खा लेता है।
  • पकने की अवस्था में पौधों को तल से भी काटते है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में जैसे एच. आर. एम. एस. ओ. 1564 का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए अगर मिट्टी में पोटॉश की कमी हो तो।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।
  • रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड देखे।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।
  • निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट स्पोडोपेटरा लिटुरा
प्रचलित नाम तम्बाखू इल्ली
क्षति
  • इल्ली अवस्था में अधिक क्षतिदायक है।
  • फूल आने के पहले यह इल्ली आक्रमण करती है।
  • तरुणावस्था की इल्लियाँ समूह में पत्तियों के हरे भाग को खाती है और बड़ी होने पर पूरी पत्तियाँ खाने लगती है या उन पर बड़े छेद बना देती है।
  • खाई हुई पत्तियाँ सफेद पीले जाल की तरह दिखती है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहलीस्तर 10 लार्वा / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।
  • प्रतिरोधक किस्में जैसे जे.एस.90-41, एच.आइ.एम.एस.ओ.1564 का उपयोग करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए अगर मिट्टी में पोटॉश की कमी हो तो।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि से बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
  • रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड़ देखे।
  • प्रकाश और फेरामोन फन्दों का उपयोग करे।
  • वनस्पति नियंत्रण के लिए एन.पी. वायरस 250 एल.ई. 500 मि.लि पानी के साथ छिड़काव करे।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले। निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट एफिड
प्रचलित नाम माहू
क्षति
  • यह फोटो माहू कीट का है
  • वयस्क अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाते है।
  • एफिड रस चूसने वाले कीट है।
  • वयस्क , तने, पत्ती, और फल्ली का रस चूसकर उपज में कमी कर देते है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • बोनी उचित समय पर करें।
  • समय पर बोनी से कीट का आक्रमण कम होता है।
  • प्रतिरोधक किस्में जैसे जे.एस.335,जे.एस. 71-05, जे.एस. 88-66 का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
    रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड़ देखे।
  • प्रकाश और फेरामोन फन्दों का उपयोग करे।
  • बीज उपचार के लिए 70 डब्लू एस थाईमेथाज़ान 3 ग्राम /कि.ग्रा की दर से करे।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले। निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
  • अंकुरण के एक सप्ताह के बाद थाईमेथाज़ान25 डब्लू एस 100 ग्राम/हे का छिड़काव करे।
कीट हेलीकोवरपा अरमीजेरा
प्रचलित नाम चने का फल्ली छेदक कीट
क्षति
  • यह फोटो चने की फल्ली छेदक कीट का है।
  • इल्ली एवं लार्वा अवस्था में सबसे ज्यादा क्षति पंहुचाते है।
  • सामान्यत: कीट का आक्रमण अगस्त माह में होता है।
  • यह पत्तियों का भक्षक है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
  • रसायनिक नियंत्रण हेतू खंड़ देखे।
  • प्रकाश और फेरामोन फन्दों का उपयोग करें।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।
  • फल्ली छेदक कीट के लिए आर्थिक देहली स्तर 2 लार्वा / मीटर लम्बाई पुष्पावस्था एवं फल्ली बनने की अवस्था में है।
निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500मि.लि/हे की दर से
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
  • यदि कीट का आक्रमण जारी रहे तो छिड़काव 15-20 के बाद करे।
कीट चक्रभृंग
प्रचलित नाम ओबरिया, गर्डल बीटल
क्षति
  • यह फोटो चक्र भृंग कीट का है।
  • इल्ली एवं लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाते है।
  • प्राय: कीट का आक्रमण जुलाई के अंतिम सप्ताह से अगस्त के पहले पखवाड़े में होता है।
  • वयस्क मादा तने या टहनियों पर दो रिंग बनाती है। रिंग में 3 छोटे छेद बनाकर तने के बीच में पीले अंडे देती है। अंडे से इल्ली निकलने पर वह तने को अंदर से खाती है जिससे तना व टहनियां मुरझाकर सूख जाती है।
  • पौधा भूमि से 15 से 20 से.मी. उपर टुट जाता है।
आई.पी. एम.
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्मे जैसे जे.एस. 71 05, पी.के.1162, जे.एस.335 का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
  • खेत एवं आसपास के क्षेत्र में खरपतवार नियंत्रण करें।
  • लाइट ट्रेप का उपयोग करें।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।
  • 10 जी. फोरेट 10 कि.ग्रा./हे बोनी के पहले उपयोग कों।
निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से छिड़काव करें।
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का छिड़काव करें।
कीट ग्राइलस डोमेसटीकेटा / होमीयोग्राइलस
प्रचलित नाम काले झिंगुर
क्षति
  • यह फोटो काले झिंगुर का है
  • वयस्क अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाते है।
  • जुलाई अगस्त में आक्रमण करते है।
  • ज्यादातर रात में आक्रमण करते है और दिन में छिप जाते है।
  • काले वयस्क भृंग बीज पत्रों को खाते है और झिंगुर पौधे को ऊपर से खाते है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।
नियंत्रण
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।
कीट हाईलेमया सीलीकरुरा
प्रचलित नाम बीजमेंगट
क्षति
  • यह फोटो बीज मेंगट का है।
  • मेंगट अवस्था में सबसे ज्यादा क्षति पंहुचते है।
  • यह बीज और अकुंर पर भोजन के लिए निर्भर रहते है।
  • मेंगट अंकुरित बीजों को खा जाते है और उनकी जड़े भी खा लेते है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले। निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि.ग्रा /हे का खेत में छिड़काव करे।
  • बीज के उपचार के लिए कार्बोफयुरन 75 डब्लू पी 5 ग्रा /हे की दर से करने पर कीट का आक्रमण रोका जा सकता है।
  • यदि फसल पर आक्रमण हो तो डाईमेथोएट 30 इ.सी. 0.03 प्रतिशत की दर से पानी में घोल कर
    छिड़काव करे।
कीट एग्रोटीस इपसलन
प्रचलित नाम कटुआ इल्ली
क्षति
  • यह फोटो कटुआ इल्ली का है।
  • लार्वा अवस्था में क्षति ज्यादा पहुंचाते है।
  • अक्सर पौधों को जमीन की सतह से काटकर खाते है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • मिट्टी में पोटॉश की कमी पर पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले। निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट सिनोरेन
प्रचलित नाम नीला बीटल
क्षति
  • यह फोटो नीले बीटल का है।
  • मेगंट अवस्था में क्षति पहुंचाता है।
  • भोजन के लिए बीज, अकुंरित पौधो पर निर्भर रहता है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 4 लार्वा / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले। निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट डाईक्रेशिया ओरीचेलशिया, क्राईसोडिएकसीस एक्युटा
प्रचलित नाम हरी अर्धकुड़लाकार इल्ली
क्षति
  • यह फोटो हरी अर्ठ्ठकुड़लाकार इल्ली का है।
  • लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति देते है।
  • कीट पत्तियों पर निर्भर रहता है।
  • ज्यादा मात्रा में कीट सारी पत्तियां खा जाता है और सिर्फ तना रह जाता है।
  • फल्ली लगते समय छेद बनाकर दाना खा लेता है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 3 लार्वा / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में जैसे एन. आर.सी.-7, पूसा 16, पूसा 20, पूसा 24, जे.एस. 80-41, पी.एस. 564, पी. के. 42 का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में
    लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले। निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी.20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट मोसीस अनडेटा
प्रचलित नाम भूरी अर्धकुड़लाकार इल्ली
क्षति
  • यह फोटो भूरी अर्ठ्ठकुड़लाकार इल्ली का है।
  • लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचती है।
  • यह सोयाबीन की पत्तियों पर निर्भर रहते है।
  • ज्यादा मात्रा में कीट पौधों की सब पत्तियां खा लेते है और तना रह जाता है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 4 लार्वा / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट स्पोडॉपटेरा इज़ीगुआ
प्रचलित नाम अलसीइल्ली
क्षति
  • यह फोटो अलसी इल्ली की है।
  • लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति होती है।
  • सर्वप्रथम आक्रमण जुलाई में देखा जा सकता है।
  • कीट पत्ती भोजी है।
  • तरुण लार्वा प्रारंभिक अवस्था में नई बंद पत्तियों को खाता है।
  • बड़े होने पर पूरी पत्तियां खा जाते है।
  • लार्वा जाल सा बुन लेता है जिससे पत्तियां आपस में चिपक जाती है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट स्पोलोसोमा ओलीक्वा
प्रचलित नाम रोयेदार इल्लियां या कम्बल कीट
क्षति
  • यह फोटो बिहार की रोयेदार इल्ली का है ।
  • लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाती है।
  • कीट पत्तियों पर भोजन के लिए निर्भर रहता है।
  • अगस्त के अंतिम सप्ताह में कीट आक्रमण करता है।
  • तरुण लार्वा पत्ती के हरे भाग को खा लेता है जिससे पत्ती भूरी पीली दिखने लगती है।
  • कीट पत्तियों को कोने से खाता है।
  • पत्ती जाल की तरह दिखती है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 5 वयस्क / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।


    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट एमसेक्टा मूराई
प्रचलित नाम लाल रोयेदार इल्ली
क्षति
  • यह फोटो लाल रोयेदार इल्ली का है।
  • लार्वा अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाती है।
  • कीट पत्तियों पर निर्भर रहता है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट बरमरशिया टेबाकी
प्रचलित नाम सफेद मक्खी
क्षति
  • यह फोटो सफेद मक्खी का है।
  • यह बहुभोजी कीट है।
  • प्रौढ़ अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाती है।
  • ये पत्तियों की कोशिकाओं का रस चूसते है।
  • पत्तियां पीली पड़ जाती है।
  • ये मोजाइक रोग को फैलाते है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि./हे का उपयोग करें।
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट इमपोस्का इन्डीकस
प्रचलित नाम हरा मच्छर
क्षति
  • यह फोटो हरे मच्छर का है।
  • पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते है।
  • अधिक आक्रमण पर पत्तियां सूख जाती है और गिर जाती है जिससे पौधा पत्ती रहित हो जाता है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि./हे का उपयोग करें।
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट केलिओथिप्स इन्डीकस
प्रचलित नाम थिप्स
क्षति
  • यह फोटो थिप्स का है।
  • यह बहुभोजी है।
  • वयस्क अवस्था में ज्यादा क्षति पहुंचाती है।
  • यह अत्याधिक रस चूसने वाला कीट है।
  • संक्रमित पौधा सफेद भूरा हो जाता है। पत्ती सूख जाती है। और सारी पत्तियां गिर जाती है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि./हे का उपयोग करें।
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।
कीट नेजेरा विरीडुला
प्रचलित नाम हरा गंधी बग
क्षति
  • यह फोटो हरी गंधी बग का है।
  • यह बहुभोजी है।
  • ये फल्ली का रस चूसते है।
  • दाने सिकुड़ जाते है।
  • प्रभावित भाग सड़कर भूरा या काला हो जाता है।
  • यह अत्याघिक रस चूसने वाला कीट है।
आई.पी. एम.
  • क्षतिग्रस्त पौधे को उखाड़कर नष्ट करें।
  • रसायनिक नियंत्रण आर्थिक देहली स्तर 1 बग / मीटर लम्बाई होने पर ही करें।
  • गर्मी में गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • मानसून के बाद बोनी करना चाहिए।
  • उपयुक्त बीज दर ही अपनायें।
  • अत्याधिक नाईट्रोजन उर्वरकों का उपयोग न करें।
  • पोटॉश खाद का उपयोग निश्चित होना चाहिए।
  • खरपतवार नियंत्रण करें।
  • जैविक नियंत्रण के लिए मकड़ी, छिपकली, मकोड़े, चिड्डे, आदि का बचाव करना चाहिए।
  • सोयाबीन को अन्तर्रवत्तिय फसलें जैसे जल्दी पकने वाली अरहर या मक्का या ज्वार 4:2 के अनुपात में लगाए।
नियंत्रण
  • रसायनिक कीटनाशकों का उपयोग उस समय करना चाहिए जब कीट की संख्या आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले।

    निम्नलिखित में से किसी भी एक कीटनाशक को 600-800 लीटर पानी में मिलाकर उपयोग करें-:
  • बोनी के पहले 10 जी. फोरेट 10 कि./हे का उपयोग करें।
  • इन्डोसल्फान 35 ई.सी. 1200-1500 मि.लि /हे की दर से
  • मोनोक्रोटोफोस 36 एस. एल. 800 मि.लि/हे की दर से छिड़काव करें।
  • ट्राईजोफोस 40 ई.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • क्वीनॉलफोस 25 एम.सी. 1000 मि.लि./हे की दर से छिड़काव करें।
  • मिथाईल पैराथाइन 2 प्रतिशत डी.पी. 20 कि./हे का उपयोग करें।