फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - सूरजमुखी

रोग प्रबंधन - सूरजमुखी

रोग

अल्टेनेरिया पर्ण दाग



हिन्दी नाम

अल्टेनेरिया पर्ण दाग

कारक जीवाणु

अल्टेनेरिया हेलिएन्थाई

क्षण एवं क्षति  

  1. इस बीमारी में पत्तियों पर अनियंत्रित गोलाकार 2 से इस बीमारी में पत्तियों पर अनियंत्रित गोलाकार 2 से 3 से.मी. के गहरे भूरे धब्बे बनते है जिनका किनारा पीला सा रहता है।

नियंत्रण

  1. 0.2 प्रतिशत मेनकोजेब का छिड़काव करें।

आई.पी. एम.

  1. ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई करें।

  2. फसल चक्र अपनाए।

  3. अच्छी तरह सड़ी हुई खाद का उपयोग करें।

  4. सहनशील या प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।

  5. गर्मी में सुबह हल्की सिंचाई करके खेत को पॉलीथीन से ढक दें जिससे उष्मा के कारण खरपतवार नष्ट हो जाते है।


रोग

हेड रस्ट



 

हिन्दी नाम

हेड रस्ट

कारक जीवाणु

राइजोपस अरिजस

लक्षण एवं क्षति  

  1. हेड की नीचे की पत्तियां आल्टरनेरिया के संक्रमण के कारण सूख जाती है।

  2. हेड की निचली सतह पानी के सोकने के कारण भूरी सड़ी हो जाती है।

  3. कीड़े छोटे छेद बनाकर हेड के अन्दर घुस जाते है तथा नमी से रोजोपन नामक फंफूद के कारण सड़न तीव्रता से बढ़ती है।

नियंत्रण

  1. एम.-डाईथेन का बाली बनते समय दो बार छिड़काव करें।

आई.पी. एम.

  1. ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई करें।

  2. फसल चक्र अपनाए।

  3. अच्छी तरह सड़ी हुई खाद का उपयोग करें।

  4. सहनशील या प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।

  5. खेत में साफ सफाई समय समय पर करें।


रोग डाऊनी मिल्डयू



 

हिन्दी नाम मुदुरोमिल आसिता
कारक जीवाणु प्लोज्मोपोरा हेल्सिटेडी
लक्षण एवं क्षति  
  1. रोग ग्रस्त पौधा छोटा रहता है।, जिसमें पत्तियां मोटी एवं पत्तियों की नसें सफेद पीली हो जाती है।

  2. पत्तियों की निचली सतह पर फंफूद दिखती है।

  3. टांड एव्र अधिक नमी में फंफूद पत्तियों की ऊपरी सतह पर भी फैल जाती है।

नियंत्रण
  1. मेटेक्सील 5 ग्राम/कि.ग्रा. बीज की दर से बीजउपचार करें।

  2. एपरॉम 35 एस.पी. का उपयोग रोग को निंयत्रित करने के लिए किया जा सकता है।

आई.पी. एम. 
  1. ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई करें।

  2. फसल चक्र अपनाए।

  3. अच्छी तरह सड़ी हुई खाद का उपयोग करें।

  4. सहनशील या प्रतिरोधक किस्मों जैसे एम.एस.एफ.-1, एम.एस.एफ.एच-30, एम.एस.एफ.एच-48, एल.एस.-11, आई.ए.एच.एस.-14, सनजेन-96, पी.ए.सी.-20, एन.एस.एच.-23 और आई.सी.आई-331का उपयोग करें।

  5. बोनी जल्दी करें।

  6. अत्याधिक सिंचाई करें।

  7. जल निकास की अच्दी व्यवस्था करें।

  8. रोग ग्रस्त पौधों को उखाड़कर फेक दें।


 
रोग चारकोल रॉट

हिन्दी नाम चारकोल रॉट
कारक जीवाणु मेक्रोफेमिना फेसिलेना
लक्षण एवं क्षति  
  1. यह रोग सूखे और नमी की कमी के कारण होता है।

नियंत्रण

-

आई.पी. एम. 
  1. पास पास पौधों को न लगाए।

  2. उपयुक्त पोषक तत्वों की मात्रा बनाए रखें।

  3. जब मिट्टी सूख जाए एवं मिट्टी का तापमान बढ़ जाए तब सिंचाई अवश्य करें।

  4. अधिक प्रकोप वाले क्षेत्रों में फसल चक्र अपनाए।


रोग सूरजमुखी मोजेक वायरस

हिन्दी नाम सूरजमुखी मोजेक वायरस
कारक जीवाणु सूरजमुखी मोजेक वायरस
लक्षण एवं क्षति  
  1. गोल और हरिमाहीन धब्बे सबसे पहले दिखाई पड़ते है।

  2. अगली अवस्था में धब्बे मिलकर बढ़े हो जाते है।

  3. पौधे छोटे रह जाते है।

  4. पौधों पर कमजोर बालियां आती है और बीज सिकुड़े होते है।

नियंत्रण
  1. रसायनिक नियंत्रण उपलब्ध नहीं है।

आई.पी. एम. 
  1. खेत और उसके आसपास के खरपतवार नष्ट करें।

  2. रोग ग्रस्त पौधों और उनके भाग नष्ट करें।


रोग चुर्णित आसिता 

हिन्दी नाम चुर्णित आसिता
कारक जीवाणु इरीसाइफी सिकोरेसिएरम
लक्षण एवं क्षति   -
 
नियंत्रण
  1. 25-30 कि.ग्रा./हे सल्फर चूर्ण का उपयोग करने से रोग के आक्रमण में कमी होती है।

आई.पी. एम. 
  1. स्वच्छ खेती करें।

  2. संक्रमित पौधों को नष्ट करें।

  3. जल्दी पकने वाली किस्मों का उपयोग करें।


रोग रस्ट

हिन्दी नाम किट्ट
कारक जीवाणु पक्सीनीया हेलिएन्थी
लक्षण एवं क्षति  
  1. इस रोग में पत्तियों पर छोटे लाल भूरे धब्बे बनते है जिन पर जंग के रंग का पाऊडर होता है।

  2. बाद में रोग ऊपर की पत्तियों पर भी फैल जाता है। तथा पत्तियों पीली होकर गिर जाती है।

नियंत्रण
  1. डाईथेन एम-45 का उपयोग करें।

आई.पी. एम. 
  1. प्रतिरोधक एवं सहनशील किस्मों का उपयोग करें।


रोग स्कोलेरियियल उकटा और कॉलर रॉट

हिन्दी नाम स्कोलेरियियल उकटा और कॉलर रॉट
कारक जीवाणु स्कोलेरियियल रोल्फसाई
लक्षण एवं क्षति  
  1. जुलाई से अगस्त के बीच यह संक्रमण होता है।

  2. पौधे सूख जाते है।

  3. तने का निचला तना सफेद या भूरी फंफूद से घिर जाता है।

  4. अधिक संक्रमण में पौधा मर जाता है।

नियंत्रण
  1. 3 ग्राम/कि.ग्रा बीज की दर से कैप्टन या थाईरम से बीज उपचार करें।

आई.पी. एम. 
  1. गर्मी में गहरी जुताई करें।

  2. खेत में साफ सफाई रखें।

  3. सहनशील और प्रतिरोधक किस्में उपयोग करें।