फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - तिल

रोग प्रबंधन - तिल

रोग

फाईटोपथोरा ब्लाइट

हिन्दी नाम

फाईटोपथोरा झुलसन

कारक जीवाणु

फाईटोपथोरा पेरासिटीका

लक्षण एवं क्षति 

  1. पत्तियों तनों पर जलासिक्त धब्बे दिखते है।

  2. इस स्थान पर सिंघाड़े के धब्बे बनते है जो बाद में काले हो जाते है।

  3. आध्द वातावरण में रोग तेजी से फैलता है जिससे पौधा झुलस जाता है।

  4. जड़े सड़ जाती है।

नियंत्रण

  1. 0.3 प्रतिशत एप्रोन 35 एस.डी. या थाईरम 0.3 प्रतिशत या ट्राईकोडर्मा हजारीएनम या टी.विरिडी. या बेसीलस सबटिलिस 0.4 प्रतिशत से बीजोपचार कर बोना चाहिए।

  2. तना एवं जड़ सड़न की स्थिति में सात दिन के अंतराल से मिट्टी को रोग ग्रसित पौधों के साथ 2 या 3 बार रेडोमिल एमजेड 0.25 प्रतिशत घोल से गीला करना चाहिए।
    या

  3. रेडोमिल एमजेड 0.25 प्रतिशत या कॉपर ओक्सीक्लोराइड 0.25 प्रतिशत का 10 दिन के अंतराल से रोग के शुरू होने पर तीन बार छिड़काव करें।

आई.पी. एम

  1. प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।

  2. पौधे के अवशेषों को जलाकर नष्ट करें।

  3. फसल चक्र अपनाए।

  4. अन्तरवर्तीय फसलें जैसे तिल और बाजरा ( 3:1 ) को अपनाए।


रोग

स्टेम एवं रूट रॉट

 

हिन्दी नाम

स्टेम एवं रूट रॉट

कारक जीवाण

स्टेम एवं रूट रॉट

लक्षण एवं क्षति

  1. रोग ग्रसित पौधे की जड़े तथा आधार पर से छिलका हटाने पर काले स्क्लेरोशियम दिखते है जिनसे जड़ का रंग कोयले के समान धूसर काला दिखता है।

  2. संक्रमित जड़ कम शक्ति लगाने पर भी कांच के समान टूट जाती है।

  3. तने के सहारे जमीन की सतह पर सफेद फंफूद दिखती है जिसमें राई के समान स्क्लेरोशिया होते है।

  4. फ्यूजेरियम सेलेनाई फंफूद के संक्रमित पौधों की जड़ सिंकुड़ी सी लालिमायुक्त होती है।

नियंत्रण

  1. ट्राईकोडर्मा हजारीएनम या टी.विरिडी. या बेसीलस सबटिलिस 0.4 प्रतिशत या थाईरम 75 एस.डी. 0.15 प्रतिशत और बेवीस्टीन 0.05 प्रतिशत का 1:1 या थाईरम 75 एस.डी. 0.3 प्रतिशत से बीजोपचार कर बोना चाहिए।

आई.पी. एम

  1. प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।

  2. पौधे के अवशेषों को जलाकर नष्ट करें।

  3. फसल चक्र अपनाए या हर दो साल में खेत बदल दे।

  4. अन्तरवर्तीय फसलें जैसे तिल और मोथबीन ( 1:1 ) या ( 2:1) को अपनाए।

  5. सिंचाई जरूरत पड़ने पर हर दो सप्ताह में करें।
     


रोग

सरकोस्फोरा पत्ती धब्बा

 

हिन्दी नाम

टिक्का रोग

कारक जीवाण

सरकोस्फोरा सिसमी

लक्षण एवं क्षति

  1. इस रोग में पत्तियों पर छोटे अनियंत्रित भूरे धब्बे बनते है जो बाद में बड़े हो जाते है।

  2. रोग की अधिकता में अधिकतर पत्तियां झड़ जाती है।

नियंत्रण

  1. थाईरम 75 एस.डी. 0.15 प्रतिशत और बेवीस्टीन 0.05 प्रतिशत का 1:1 से बीजोपचार कर बोना चाहिए।

  2. टापसिन एम. 0.1 प्रतिशत के तीन छिड़काव 15 दिन के अंतराल से रोग के शुरू होने पर करें।

आई.पी. एम

  1. प्रतिरोधक किस्मों जैसे टी.के.जी.-21 का उपयोग करें।

  2. मानसून के आने के तुरन्त बाद बोनी करें।

  3. पौधे के अवशेषों को जलाकर नष्ट करें।

  4. अन्तरवर्तीय फसलें जैसे तिल और बाजरा ( 3:1 ) को अपनाए।


रोग

कोरिनोस्पोरा ब्लाइट

 

हिन्दी नाम

कोरिनोस्पोरा अंगमारी


कारक जीवाण

कोरिनोस्पोरा केसीकोला

लक्षण एवं क्षति

  1. पत्तियों पर अनिंयत्रित बेंगनी धब्बे बनते है।

  2. रोगी पत्तियां मुड़ जाती है।

नियंत्रण

  1. थाईरम 75 एस.डी. 0.15 प्रतिशत और बेवीस्टीन 0.05 प्रतिशत का 1:1 से बीजोपचार कर बोना चाहिए।

  2. टापसिन एम. 0.1 प्रतिशत के तीन छिड़काव 15 दिन के अंतराल से रोग के शुरू होने पर करें।

आई.पी. एम

  1. प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।

  2. मानसून के आने के तुरन्त बाद बोनी करें।

  3. स्वच्छ खेती करें।

  4. पौधे के अवशेषों को जलाकर नष्ट करें।

  5. अन्तरवर्तीय फसलें जैसे तिल और बाजरा ( 3:1 ) को अपनाए।


रोग

पाऊडरी मिल्डयू

 

हिन्दी नाम

बुकनी

  

कारक जीवाण

ओइडियम

लक्षण एवं क्षति

  1. पत्तियों पर सफंद चूर्ण दिखता है।

  2. रोग की तीव्रता में तनों पर भी दिखता है।

  3. पत्तियां झड़ जाती है।

नियंत्रण

  1. 0.2 प्रतिशत गीला सल्फर का 10 दिन के अंतराल से रोग के शुरू होने से पत्तियों पर छिड़काव करें।

आई.पी. एम

  1. मानसून के आने के तुरन्त बाद बोनी करें।

  2. स्वच्छ खेती करें।

  3. पौधे के अवशेषों को जलाकर नष्ट करें।

  4. अन्तरवर्तीय फसलें जैसे तिल और बाजरा ( 3:1 ) को अपनाए।


रोग

बेक्टीरियल ब्लाइट

 

हिन्दी नाम

जीवाणु झुलसन

कारक जीवाण

जेन्थोमोनस केम्पेस्ट्रिस पीवी. सिसमी

लक्षण एवं क्षति

  1. पत्तियों पर गहरे भूरे से काले अनियमित धब्बे दिखते है, जो आर्ध्द एवं गर्म वातावरण में तेजी से बढ़ने के कारण पत्ते गिर जाते है।

  2. तनों के संक्रमण में पौधा मर जाता है।

नियंत्रण

  1. बोने से पहले बीजों को 52 डि.सेन्टीग्रेड पर 10 मिनिट गर्म पानी से बीजोप्चार करें।

  2. रोग के लक्षण प्रकट होते ही स्ट्रेपटोसाइलिन ( 500 पी.पी.एम.) का पत्तियों पर छिड़काव करें।

  3. यदि आवश्यक हो तो 15 दिन के अंतराल से दो बार छिड़काव करें।
     

आई.पी. एम

  1. फसल चक्र अपनाए।

  2. फसल अवशेषों को नष्ट करें।
     


रोग

बेक्टीरियल लीफ स्पाट

 

हिन्दी नाम

जीवाणु पत्ती धब्बा

कारक जीवाण

सूडोमुनास सिरेंजी

लक्षण एवं क्षति

  1. पत्तियों पर गहरे भूरे कोणीय धब्बे जिनके किनारे काले रंग के दिखते है जो आर्ध्द एवं गर्म वातावरण में तेजी से बढ़तें है जिससे पत्ते गिर जाते है।

नियंत्रण

  1. बोने से पहले बीजों को 52 डि.सेन्टीग्रेड पर 10 मिनिट गर्म पानी से बीजोप्चार करें।

  2. रोग के लक्षण प्रकट होते ही स्ट्रेपटोसाइलिन ( 500 पी.पी.एम.) का पत्तियों पर छिड़काव करें।

  3. यदि आवश्यक हो तो 15 दिन के अंतराल से दो बार छिड़काव करें।

आई.पी. एम

  1. फसल चक्र अपनाए।

  2. फसल अवशेषों को नष्ट करें।
     


रोग

फाईलोडी  

 

हिन्दी नाम

पर्णताभ

कारक जीवाण

माइकोप्लाज्मा

लक्षण एवं क्षति

  1. सभी पुष्पी भाग हरे रंग के पत्तियों के समान हो जाते है।

  2. पत्तियां छोटी गुच्छों में लगती है।

  3. रोगी पौधों में फल्ली नहीं बनती, यदि बनती है तो बीज रहित होती है।

नियंत्रण

  1. फोरेट 10 कि.ग्रा.#हे की दर से मिट्टी में मिलाए।

  2. 0.03 प्रतिशत डाई मेथोएट का छिड़काव बोनी के 30, 40 एवं 60 दिन बाद करें।
     

आई.पी. एम

  1. रोग ग्रस्त पौधों को उखाड़ फेंके।

  2. मानसून आने के 3 सप्ताह बाद बोनी करें।

  3. अन्तरवर्तीय फसलें जैसे तिल और अरहर 1:1 के अनुपात में उगाए।