फसल सिफारिशें
खरीफ फसल - तिल

उर्वरक प्रबंधन

  • भूमि उर्वरकता को बनाए रखने के लिए तथा अधिक उपज लेने के लिए अंतिम बार हल चलाने से पहले 10 टन/हे के मान से गोबर की खाद को मिट्टी में मिलाना चाहिए।
  • तिल के लिए रसायनिक खाद भी असरकारक है।
  • एन.पी.के. ( कि.ग्रा./हे) के लिए अनुमोदित मात्रायें
    असिंचित 40 :30 : 20
    ग्रीष्म 60 :40 : 20
  • खरीफ फसल में नत्रजन की आधी मात्रा और फास्फोरस तथा पोटॉश की मात्रा मूल खाद के रूप में दे।
  • 1. नत्रजन की शेष मात्रा पौधों में फूल निकलने के समय यानि बोनी के 30-35 दिन बाद दें।

अन्तर सस्य क्रियायें

  • उत्तम प्रंबधन की दृष्टि से बोनी के 15-20 दिन निदाई एवं पुन:15-20 बाद खरपतवारों की सघनता को देखते हुए आवश्यकतानुसार करें।

सिंचाई प्रबंधन

  • इस फसल को सामान्यत: सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती है। परन्तु यह फसल की विभिन्न वनस्पतिक अवस्थायें सूखे के प्रति संवेदनशील हैं।
  • एक सिंचाई उपलब्ध होने पर फूल आने पर सिंचाई करें।