फसल सिफारिशें

खरीफ फसल - उड़द

कीट प्रबंधन - उड़द

कीट ओफियोमाया फेसियोली
प्रचलित नाम तना मक्खी
क्षति
  1. कीट का वयस्क काला चमकदार, लगभग 2 मि. मि. का होता है।
  2. मेगट पत्तियों के मुख्य शिरा में सुरंग बनातें हुये तने में पहुंच जाती हैं।
आई.पी. एम
  1. प्रतिरोधक किस्में को उपयोग करें।
  2. गर्मी में गहरी जुताई करें।
  3. जल्दी बोनी करें।
  4. समय पर सिंचाई करें।
नियंत्रण
  1. बोनी के पहले कार्बोफ्यूरान को मिट्टी में मिलाए या फोरेट को 1.5 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व /हे को बीज के नीचे डाले।
  2. फोरेट और कार्बाफ्यूरान 1.5 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व /हे की मात्रा लें।
  3. इमीडोक्लोप्रिड या कार्बासल्फान से बीज उपचारित से कीट के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
    कीट ओफियोमाया फेसियोली
कीट मडुरेशिया ओप्सीक्यूरेल्ला
प्रचलित नाम पस्सू भृंग
क्षति
  1. फसल की द्विपर्ण अवस्था में ही पिस्सू भृंग के प्रौढ़ पत्तों को कुतरकर छेद बनाते है जिससे प्रति पत्ता लगभग 1 से 10 छेद होकर 30 से 40 प्रतिशत पत्ते क्षतिग्रस्त होते पाये गये।
  2. प्रकोप की स्थिति मे पत्ते छन्नी जैसे दिखते है फलत: पौधे की बाढ़ मारी जाने के साथ साथ ये सूख भी जाते है।
  3. प्रौढ़ कीट छोटे शरीर वाला, लाल भूरी धारीदार व रात्रिचर होता है।
  4. यह मात्र स्पर्श से उड़ जाता है जबकि इस कीट की इल्ली फसल की जड़ों की गठानों को खाकर हानि पंहुचाते है।
आई.पी. एम
  1. गहरी जुताई करें।
  2. अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करें।
नियंत्रण
  1. क्लोरपाइरीफॉस 35 ई.सी. 1-1.2 लीटर 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
    या
    दानेदार फोरेट 10 प्रतिशत 10 कि.ग्रा. /हे को बोनी के पहले मिट्टी में मिलाए।
कीट बेमेसिया टबाकी
प्रचलित नाम सफेद मक्खी
क्षति
  1. यह छोटा कीट दलहनी फसलों पर पीली मोजेक वायरस के विषाणुओं को ग्रसित पौधों से चूसकर स्वस्थ पौधों में फैलाता है।
  2. चूंकि यह तेजी से यहां वहां उड़ने वाला कीट है अत: खेत में यह बीमारी शीघ फैलती है जिससे 10 से 40 प्रतिशत तक पौधे प्रकोपित होते है।
आई.पी. एम
  1. प्रतिरोधक किस्में को उगाए।
नियंत्रण
  1. क्वीनॉलफॉस 25 ई.सी. 1.5 लीटर /हे 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
  2. जिन क्षेत्रों में मोजेक का प्रकोप अधिक हो तो इमीडोक्लोप्रिड से बीज उपचारित करें।
कीट टेनियोथ्रिप्स स्पी.
प्रचलित नाम तेला
क्षति
  1. ये छोटे मोटे काले रंग के कीट पत्तों को कुरेदकर खाते है तथा इसी प्रकार फूलों को भी हानि पंहुचाते है।
आई.पी. एम
  1. समय समय पर पौधों का निरीक्षण करें।
  2. गहरी जुताई करें।
  3. समय पर बोनी एवं उर्वरक की संतुलित मात्रा का उपयोग करें।
  4. रसायनिक नियंत्रकों का उपयोग जरूरत पड़ने पर ही करें।
  5. जैविक नियंत्रक जैसे क्रायसोपर्ला परभक्षी कीटों के संरक्षण को प्रोत्साहित करें।
नियंत्रण
  1. मिथाईल डेमाटोन 25 ई.सी. 500 मि.ली. 600-700 लीटर पानी में घोलकर प्रति हे. की दर से छिड़काव करें।
    मरूका टेसटूलेलिस
कीट मरूका टेसटूलेलिस
प्रचलित नाम फली भेदक
क्षति
  • इल्ली काफी चंचल होती है।
  • ये छोटी, मोटे शरीर वाली, मटमैले रंग की होती है जिस पर काले, छोटे छोटे गुमड़ होते है।
  • यह इल्ली शुरू में पत्तों, कलियों तथा हरी फल्लियों का जाला बनाकर खाती है।
  • तत्पश्चात कीट हरी फल्लियों के अन्दर घुसकर बढ़ते हुए दानों को खाती रहती है।
  • इनके द्वारा फसल को 15 से 20 प्रतिशत तक हानि होती है।
आई.पी. एम
  • प्रतिरोधक किस्में का उपयोग करें।
  • गहरी जुताई करें।
  • जल्दी बोनी करें।
  • उचित बीज दर एवं उर्वरक प्रबंधन अच्छी फसल के लिए आवश्यक है।
नियंत्रण
  1. क्वीनालोफॉस 25 ई.सी. का 1500 मि.ली. या मिथाईल डेमाटोन 25 ई.सी. 500 मि.ली. 600-800 लीटर पानी में प्रति हे की दर से छिड़काव करें।
कीट एफिसक्रेसीवोरा
प्रचलित नाम माहू
क्षति
  • इस कीट के वयस्क काले, चमकदार, लगभग 2 मि.मि. के एवं कुछ मे पंख होते हैं।
  • शिशुओं के ऊपर मोम जैसा पदार्थ होता है, जिससे उनका रंग स्लेटी जैसा होता है।
  • कीट के शिशु और वयस्क तने के नाजुक भाग से रस चूसते है जिससे तना अकड़ जाता है और पत्ती तितर बितर हो जाती है।
  • ये मीठा चिपकते वाली फंफूद छोड़ते है जिस पर काली परत जम जाती है।
आई.पी. एम.
  • समय समय पर पौधों का निरीक्षण करें।
  • रसायनिक नियंत्रकों का उपयोग जरूरत पड़ने पर ही करें।
  • जल्दी बोनी करें।
  • स्वच्छ खेती करें।
  • नत्रजन एवं पानी का अधिक उपयोग न करें।
  • जैविकनियंत्रिकों का उपयोग कर
नियंत्रण
  • फॉसफोमिडॉन का 250 मि.ली. 600 से 700 लीटर पानी में प्रति हे की दर से छिड़काव करें।
    या
    मिथाईल डेमाटोन 25 ई.सी. 500 मि.ली. 600 से 700 लीटर पानी में प्रति हे की दर से छिड़काव करें।
  • 15 दिन पश्चात आवश्यकता होने पर छिड़काव पुन: करें।
कीट इम्पोएसका केरी
प्रचलित नाम फुदका
क्षति
  • वयस्क हरा आकार में छोटा, छत के समान मुड़ा हुआ रहता है।
  • शिशु भी वयस्क के समान दिखता है सिवाय पंखों के।
  • वयस्क एवं शिशु पत्तियों की निचली सतह से रस चूसते है।
  • ग्रसित पत्तियां प्याले के समान मुड़े, पीली किनार लिए हुए होते है।
  • अधिक संक्रमण से पत्तियां लाल भूरे रंग में बदल जाती है एवं बाद में गिर जाती है।
आई.पी. एम
  • समय समय पर खेत का निरीक्षण करें।
  • जल्दी बोनी करें।
  • नत्रजन और पानी का अधिक उपयोग न करें।
नियंत्रण
  1. फॉसफोमीडॉन 250 मि.ली. 750 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से
    या
    मिथाईल डेमाटॉन 25 ई.सी. 500 मि.ली 600 से 700 लीटर पानी में प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।
कीट नीली तितली
प्रचलित नाम नीली तितली
क्षति
  • छोटी नीली तितलियां जिनके पंख ऊपर से नीले एवं नीचे से हल्के भूरे होते है।
  • पुष्पावस्था में आक्रमण करती है।
  • लार्वा पत्तियों को कुतरते है एवं अधिकतर कली, फूल एवं फल्लियों को खाकर नष्ट करते है।
आई.पी. एम
नियंत्रण
  • क्वीनालोफॉस 25 ई.सी. का 1500 मि.ली. या मिथाईल डेमाटोन 25 ई.सी. 500 मि.ली. 600-800 लीटर पानी में प्रति हे की दर से 15 दिन के अंतराल से छिड़काव करें।
कीट हेलीकोवर्पा आर्मीजेरा
प्रचलित नाम चने की इल्ली
क्षति
  • प्रौढ़ कीट भूरे रंग का होता है।
  • अगले पंखों में सेम के बीज के समान एक एक काला धब्बा रहता है।
  • पिछले पंखों के बाहरी किनारों पर काली पट्टी रहती है।
  • इस कीट की इल्लियों के शरीर के रंग में विविधता पाई जाती है।
  • छोटी इल्लियां हरे पदार्थ को खुरचकर खाती है।
  • बड़ी इल्लियां बोंडी, फूलों, फल्लियों को नुकसान पहुंचाती है।
  • फल्लियों के उभरे हुए भाग में छेद करके इल्लियां बढ़ते हुए दानों को खाती है।
आई.पी. एम --
नियंत्रण
  1. मोनोक्रोटोफॉस 36 एस.सी. 400 मि.ली. या डाईमेथोएट 30 ई.सी. 400 मि.ली 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 15 दिन के अंतराल से पुन:छिड़काव करें।
कीट स्पोडोपेट्रा लीटूरा
प्रचलित नाम तम्बाखू इल्ली
क्षति
  • ाम्बाखू इल्ली की प्रौढ़ मादा पंखी पत्तियों में समूह में 1000 से 1500 की संख्या में अण्डे देती है।
  • अण्डों में 5-6 दिनों में छोटी छोटी इल्लियां निकलकर पत्ती के हरे भाग को खाती है जिनके कारण पत्ती सफेद एवं सिर्फ नसें ही दिखाई पड़ती है।
  • ऐसे ग्रसित पत्तियों को ध्यान से देखने पर सैकड़ों की संख्या में स्लेटी रंग की इल्लियां दिखाई देती है।
  • ये इल्लियां 6-7 दिनों तक सतूह में एक ही पत्ती में रहने के बाद पूरे खेत में फैलकर पत्तियां खाकर क्षति पंहुचाती है।
  • ये फूल आने के बाद फूलों एवं दानों को भी खाकर क्षति पहुंचाती है।
आई.पी. एम -
नियंत्रण -
कीट माईलाबिस पश्चूलेटा
प्रचलित नाम ब्लस्टर बीटल
क्षति
  • पीले या गुलाबी फूलों वाले पौधों को कीट खाता है।
  • देश के सभी भागों में पाया जाता है।
आई.पी. एम
  1. एकीकृत कीट प्रबंधन का खंड देखिये।
नियंत्रण
  • कीटनाशक की सहायता से कीट पर नियंत्रण किया जा सकता है।
  • हाथों से या जाल की मदद से कीटों को एकत्रित करके नष्ट किया जा सकता है।