फसल सिफारिशें

कीट प्रबंधन - रबी फसल -अल्सी

 
कीट कालीमक्खी  
प्रचलित नाम कालीमक्खी


क्षति
  1. प्रौढ़ मक्खी आकार में छोटी तथा नांरगी रंग की होती है।
  2. इसके पंख पारदर्शी होते है।
  3. इल्लियां को वास्तव में नुकसान पहुंचाती है गुलाबी रंग की होती है।
  4. इल्लियां, किलयों, फूलों को विशेष कर अण्डाशयों को खाती है जिससे केप्सूल नहीं बनते है एवं बीज भी नहीं बनते एवं मादा 8-17 किलयां को आक्रमित करती है।
  5. सामान्य बोनी में 60-63 प्रतिशत तथा देर से बोनी में 82-88 प्रतिशत किलयां इस कीट द्वारा ग्रसित देखी जाती है।
  6. माउा मक्खी 1 से 5 इल्ली निकलकर कली के अन्दर जनन अंगों विशेंष रूप से अण्डाशयों को खा लेती है जिससे कली पुष्प के रूप में किवसित नहीं होती तथा केप्सूल एवं बीजों का निर्माण ही नहीं होता।
आई.पी. एम 
  1. फसल की बोनी अक्टूबर मध्य के पूर्व करने से इस कीट से साधारणत:नुकसान नहीं होता है।
    निरोधक किस्में जैसे आर जवाहर 552, जवाहर 23 लगाना चाहिए।
  2. प्रकाश प्रपंच का उपयोग करें। इस कीट के प्रौढ़ रात्रि में प्रकाश करी ओर आकर्षित होते है हर दिन सुबह इनको इकट्टा करके नष्ट करें।
  3. इस कीट की इल्लियों के मित्र परजीवी कीट सस्टेसिस हेसिन्सूरी 50 प्रतिशत तक परजीवी मुक्त कर मार देते है।
  4. इसके अतिरिक्त इलासमय यूरोटोमा टीरीमस टेट्रास्टिक्स आदि मित्र कीट प्राकृमिक रूप से इस कीट के पम्गटों पर अपना निर्वाह करते हुए कालीमक्खी की इल्लियां को बढ़ने से रोकते है।
  5. एक कि.ग्रा. गुड़ को 75 लीटर पानी में घालकर इस पानी को मिट्टी के वर्तनों की सहायता से खेतों में कई स्थानों पर रखने से कीट गुडत्र वाले पात्र की ओर आकर्षित होते है।
नियंत्रण
  1. कीट की संखया अधिक होने पर फास्फोमिडान 85 एम 300 मि.ली पानी में प्रति हेक्टेयर का पहला छिड़काव इल्लियों के प्रारम्भ होने पर तथा दूसरा छिड़काव 15 दिन बाद फिर करना चाहिए।

कीट इलेफकमा एग्जीमा  

प्रचलित नाम अलसी की इल्ली
क्षति
  1. प्रौढ़ कीट मध्यम आकार का गहरे भूरे रंग या खूसर रंग का होता है।
  2. अगले पुख गहरे धूसर रंग के पीले धब्बे से युक्त होते है तथा पिछले पंख सफेद चमकीले अर्ध्द पारदर्शी होकर बाहरी सतह धूसर रंग की हो जाती है इल्लियां लम्बी, भूरे हरे रंग की होती है।
  3. ये कीट अधिकतर पत्तियों की बाहर की सतह को खाती है।
  4. इस कीट की इल्लियां तना के ऊपरी भाग में पत्तियों को चिपका कर खाती रहती है इस कारण कीट से ग्रसित पौधों की बाढ़ रूक जाती है।
आई.पी. एम  -
नियंत्रण
  1. इस कीट की 92 प्रतिशत इल्लियां मरर्तिर इंडिका नामक मित्र कीट के परजीवी युक्त होती है। तथा बाद में मर जाती है।
 

कीट अर्धकुण्डक इल्ली  

प्रचलित नाम अर्धकुण्डक इल्ली
क्षति
  1. इस कीट के प्रौढ़ शलभ के अगले पंखों पर सुनहरे धब्बे रहते है इल्लियां हरे रंग की होती है।
  2. इल्लियां पत्तियों को खाती है बाद में फल्लियों को भी इस कीट की इल्लियों नुकसान पहुचाती है।
आई.पी. एम 
  1. फरोमेन एवं प्रकाश प्रंपचों का उपयोग करें।  
नियंत्रण
  1. क्लोरीपायरीफास 20 ई.सी. 750 से 1000 मि.ली मात्रा /हे. की दर से छिड़काव करें।
  2. कीट की संख्या अधिक होने पर मोनोक्रोटोफास 36 ई.सी. 750 मि.ली का छिड़काव करें।
 

कीट हेलीकोवरपा आर्मीजेरा   

 
प्रचलित नाम चने की इल्ली
क्षति
  1. इस कीट के प्रौढ़ भूरे रग के होते है तथा अगले पंखों से सेम के बीज के समान काला धबा रहता है।
  2. इल्लियों के रंग में विविधता पाई जाती है जैसे पीले हरे गुलाबी भूरे रंग की ।
  3. शरीर के किनारों पर इल्लियों में हल्की एवं गहरी धारियों होती है।
  4. छोटी इल्लियां पौधे के हरे पदार्थ को खुरचकर खाती है।
  5. बड़ी इल्लियां कलियां, फूलों ण्वं फलियों को नुकसान पहुंचाती है।
  6. इल्लियां फल्लियों में छेदकर अपना सिर अन्दर धूसाकर दानों को खाती है।
  7. एक इल्ली अपने जीवनकाल में 30 से 40 फल्लियों को नुकसान पहुंचाती है।
आई.पी. एम 
  1. फरोमेन एवं प्रकाश प्रंपचों का उपयोग करें।
नियंत्रण
  1. क्लोरीपायरीफास 20 ई.सी. 750 से 1000 मि.ली मात्रा /हे. की दर से छिड़काव करें।
  2. कीट की संख्या अधिक होने पर मोनोक्रोटोफास 36 ई.सी. 750 मि.ली का छिड़काव करें।