फसल सिफारिशें

रोग प्रबंधन - रबी फसल - अल्सी

 
रोग रस्ट 

हिन्दी नाम गेरूआ रोग 

कारक जीवाणु  -
लक्षण एवं क्षति

  1. पत्तियों के शीर्ष तथा निचले सतहों पर एवं तना शाखाओं पर गोल, लम्बवत नांरगी भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते है। 
नियंत्रण

  1. रोग से बचने के लिए सल्फेक्स 0.05 प्रतिशत या कैलेक्सिन 0.05 प्रतिशत या डायथेन एम.-45 0.25 प्रतिशत घोल का खड़ी फसल पर छिड़काव दो बार 15 दिन के अन्तराल से करे। 
आई.पी. एम 
  1. प्रतिरोधक जातियां जैसे आर.552 , किरण आदि का उपयोग करें।
 

रोग उकटा रोग  

   

हिन्दी नाम उकटा रोग 

कारक जीवाणु 
लक्षण एवं क्षति

  1. यह रोग अलसी का काफी हाकनकारक रोग है जो मिट्टी जनित अर्थात खेत की मिट्टी में रोगगस्त पौधे के ठूंठ से फैलता है।
  2.  इस रोग का प्रकोप अंकुरण के बाद से फसल के पकने तक की किसी भी अवस्था में हो सकता है।
  3.  रोग ग्रस्त होने पर पत्तियों के किनारे अन्दर की ओर मुड़कर मुरझा जाते है और पौधा सूख जाता है।
नियंत्रण

  1. बीज का थाईरम या टाण्सिन फंफूदनाशक दवा से 35 ग्राम# कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें।
आई.पी. एम 
  1. खेत की मिट्टी में निवेश को कम करने के लिए 2 या 3 साल का फसल चक्र अपनाए अर्थात उकटा रोग ग्रसित खेत में लगातार 2-3 वर्षो तक अलसी न लगाए।

रोग पाऊडरी मिल्डयू

   

हिन्दी नाम बुकनी रोग 
कारक जीवाणु  -
लक्षण एवं क्षति
  1. इस रोग के कारण पत्तियों पर सफेद चूर्ण सा जम जाता है।
  2.  रोग की तीव्रता अधिक होने पर दाने सिकुड़ जाते है। उनका आकार छोटा हो जाता है। देर से बुवाई करने पर एवं शीतकालीन वर्षा होने पर अधिक समय तक आर्द्वता बनी रहने पर इस रोग का प्रकोप बढ़ जाता है।
नियंत्रण

  1.  0.3 प्रतिशत बेटेबल गंधक सल्फेक्स या केरोथेन (0.2 ) का छिड़काव 15 दिनों के अन्तराल में करें।
आई.पी. एम 
  1.  फस्ल की बुआई जल्दी करें।
  2.  रोग निरोधक किस्में जैसे जवाहर-23, आर 552 एवं किरण का उपयोग करे।

रोग अल्टानेरिया ब्लाइट

 
हिन्दी नाम अल्टानेरिया ब्लाइट 


कारक जीवाणु 

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लक्षण एवं क्षति

  1. जमीन के ऊपर अलसी के पौघे के सभी भाग इससे प्रभावित होते है।
  2.  फेलों कर पखुडियों के नीचले किस्सों में गहरे भूरे रंग के लग्बवत धब्बे दिखाई देते है जो आकार में बढ़ने के साथ फूल के अन्दर तक पहुंच जाते है।
  3.  दाने नहीं बनते।
नियंत्रण

  1. रोग के बचाव के लिए बीजों को थाईरत या कोई भी कारबोन्डिेजिम दवा 2.5 ग्राम # कि.ग्रा. बीज की दर से उपचारित करें।
  2.  रोग की गम्भीरता को देखते हुये रोबराल( 0.2 ) या डाईथेन एम. 45 ( 0.21 ) का छिड़काव 15 दिन के अन्तराल में करें। 
आई.पी. एम  -