फसल सिफारिशें

रबी फसल - कुसुम

आई. पी. एम

  • हानिकारक कीटों एवं जैव कीट नियंत्रण साधनों परजीवी एवं परभक्षी कीट इत्यादि की संख्या के आकलन तक प्रति सप्ताह फसल का निरीक्षण करते रहना चाहिए । फूल आने और फल्ली बनते समय खेत का निरीक्षण एक सप्ताह में दो बार करें। करडी के लिए जनवरी के शुरू में निरीक्षण करें।
  • प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
  • देर से बोनी न करें।
  • निचले इलाकों पर करडी न उगाए।
  • रोग ग्रसित और कीट ग्रसित पौधे एवं उनके भागों को नष्ट करें ।

अन्तरसस्य क्रियायें :-

  • प्रतिरोधक/ सहनशील किस्मों का उपयोग करें।
  • ग्रीष्म कालीन गहरी जुताई करें जिससे मिट्टी जनित रोग,कीट एवं सुत्रकृमि से बचाव होता है।
  • पौधे से पौधे की दूरी 20 से 30 से.मी. रखने से रोग का आक्रमण कम किया जा सकता है।
  • बोनी अक्टूबर के पहले सप्ताह में करे जिससे कीट जैसे फुदका इत्यादि और रोगों से बचा जा सकता है।
  • स्वच्छ खेती- फसल में कीटों के प्रकोप से फसल सुरक्षा हेतु पूर्व फसल के अवशेषों को नष्ट करना आवश्यक है । फसल में खरपतवारों की अधिकता में कीट का प्रकोप अधिक होता है अत: खेत एवं मेंढों को खरपतवार रहित रखना आवश्यक है । रोग गस्त पौधों को उखाड़कर फेंक दे।

यांत्रिक नियंत्रण विधिया :-

  • प्रकाश प्रपंच - प्रकाश की ओर आकर्षित होने वाले कीटों के निरीक्षण एवं सक्रीयता के पूर्वानुमान हेतु 125 वाट मरक्यूरी व्हेपर बल्ब को प्रकाश प्रपंच में लगाकर स्थापित करें ।
  • हानिकारक कीटों के अण्ड समूह इल्लियों को एकत्रित कर बाँसों कर रखें । जैविक नियंत्रण साधनों के समीप रख कर नष्ट करें ।
  • टी अक्षर के आकार की लकडी या बांस की लगभग 10-12 खूंटी प्रति हेक्टर की दर से परभक्षी पक्षियों को आकर्षित कर बैठने हेतु लगाएं।

जैव नियंत्रण उपाय :-

  • संरक्षण : निम्नलिखित जैविक कीट नियंत्रण साधनों को संरक्षित कर जैव नियंत्रण को प्रोत्साहित किया जा सकता है। जैसे - स्पाइडर,मकडी इत्यादि ।
  • ट्राईकोडर्मा विरीडे से 4 ग्राम/ कि.ग्रा. बीज की दर से बीजोप्चारित करें।
  • हानिकारक चूसने वाले कीटों का निरीक्षण करें और इल्ली (स्पोडोप्टेरा जाति) के अण्डें एवं छोटी प्रथम अवस्था की इल्लियां फसल पर दिखते ही हेलिकोवर्पा स्पाडोप्टेरा एन.पी.वी. (न्यूक्लियर पॉलीहाड्क्रोसिस वाइरस) का 6 109 250 से 500 एल.ई (इल्ली समतुल्य) प्रति हेक्टर की दर से छिडकाव करें ।

रासायनिक विधियों द्वारा :-
  • इनके लिए क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी.12 मि.ली./कि.ग्रा अथवा क्वीनालफास 25 ई.सी. 25 मि.ली. कि.ग्रा से बीज उपचार प्रभावी है।
  • कार्बाडजिम 2 ग्राम/कि.ग्रा. की दर से बीज उपचारित करें।
  • थाईरम या मेनकोजेब 0.2 प्रतिशत जड़ सड़न के निंयत्रण के लिए उपयोग करें।
  • मेनकोजेब 0.25 प्रतिशत पत्ती धब्बा रोगों के लिए छिड़काव करें।
  • 5 प्रतिशत नीम कर्नल के सत का उपयोग करें।

खरपतवार नियंत्रण :-

  • समय पर बोनी करें। उचित बीज दर, संतुलित उर्वरकों की मात्रा का उपयोग करना चाहिए जिससे पौधों की उचित संख्या हो सके। अच्छे स्वस्थ पौधे खरपतवार से प्रांरभिक अवस्था में प्रतियोगिता कर सकते है।
  • बोनी के 45 दिन बाद तक फसल को खरपतवार रहित रखना चाहिए।
  • बोनी के 20 से 35 दिन बाद हाथ से या हो से खरपतवार नियंत्रित करना चाहिए।