फसल सिफारिशें

आई. पी. एम - रबी फसल - सरसों

  • लगभग दर्जन भर कीट सरसों की फसल पर आक्रमण करते है जिनमें चितकबरा कीट और एफिड प्रमुख है।चितकबरी कीट अंकुरण की अवस्था में हानि पहुंचाती है और एफिड फूल आने से फल्ली बनने तक आक्रमण करता है।फसल को ली बीटल और साोई दोनों फसल को हानि पहुंचाते है।

    मुख्य कीट

    • एफिड या फुदका
    • चितकबरा कीट
    • सोलाई
    • लीफ माइनर
  • सप्ताह के अन्तराल में खेत का निरीक्षण करें।
  • ट्रेप लगाकर फुदका की संख्या का निरीक्षण करें। आर्थिक देहलीज स्तर 8 से 13 फुदका प्रति 10 से.मी.

एकाकीकृत कीट प्रबंधन ( आई. पी. एम.)

  • खेत निरीक्षण:किसान और विस्तार कार्यकर्ता समय समय पर निरीक्षण करें और खेत में रोग और कीटों की उपस्थिति को देखे। फूल आने पर और फल्ली बनते समय सप्ताह में दो बार निरीक्षण करें। सरसों के माहू के लिए निरीक्षण के कार्य जनवरी में शुरू कर देना चाहिए।

सस्य क्रियाए :-

  • बोनी 20 अक्टूबर के पहले करें जिससे प्रजनन अवस्था दिसम्बर के मध्य एफिड आने के पहले आ जाए।
  • जे.एम. -1 और आर.के. 9501 जैसी प्रतिरोधक किस्में उगाए।
  • गहरी जुताई करें जिससे कीड़े,सूत्रकृमि,रोग कारक,परजीवी इत्यादि नष्ट हो जाए और फसल के पिछले अवशेषों को नष्ट करें।
  • बोनी जल्दी करें जिससे फुदका और रोगों से बचा जा सके।
  • चितकबरे कीट से बचाव के लिए बोनी के 4 सप्ताह के बाद सिंचाई करें।
  • उर्वरकों की अनुमोदित मात्रा का उपयोग करें।

यांत्रिक क्रियायें :-

  • सप्ताह के दो बार प्रथम अवस्था की इल्लियों को इकटठा कर नष्ट करें।

सरसों के प्राक्रतिक शत्रु

  • क्राइसोपा- हरा वयस्क कोमल, हल्का हरा कीट और उसके जाल जैसे पंख होते है।ये पौधे की पत्तियों को अत्याधिक खाता है।
  • मादा पक्षी बीटल - इनके अण्डे पीले, लार्वा काला होता है। वयस्क आकार में छोटे,पीले रंग के काले धब्बेदार होते है।वयस्क एफिड को खाते है।
  • सिरफिड मक्खी - लार्वा सफेद रंग के नुकीले मुंह के होते है और एफिड को खाते है। वयस्क नही खाते है। इन्हें होवर लाई कहते है।

जैविक नियंत्रण क्रियायें :-

निमाटोड समस्या :-
  • सरसों की फसल में निमाटोड की समस्या नहीं रहती है।
रसायनिक क्रियायें:-
  • ध्दिफसली या किसी अन्य कारण से बोनी में देर हो जाये तो निम्नलिखित छिड़काव करें।
  • यदि बोनी अक्टूबर के पहले सप्ताह में की हो तो आर्थिक देहली स्तर पर एक छिड़काव की आवश्यकता रहती है।
  • यदि बोनी नवम्बर के पहले सप्ताह में की हो तो आर्थिक देहली स्तर पर एक छिड़काव की आवश्यकता रहती है और 15 दिन के अन्तराल के बाद पुन: छिड़काव करें जिससे एफिड पर अच्छा नियंत्रण हो सके और उपज बढ़े। किसी भी हालत में 10 नवम्बर तक बोनी कर देनी चाहिए अन्यथा एफिड के आक्रमण से उपज में काफी कमी आती है।
  • एफिड के लिए आर्थिक देहली स्तर 8 से 13 एफिड प्रति 10 से.मी. है।
  • आर्थिक देहली स्तर आने के तीन सप्ताह तक ही छिड़काव करें ।बाद में छिड़काव करना आर्थिक रूप से ठीक नहीं है।
  • एफिड से बचाव के लिए मिथाइल डेमीटॉन 1000 मि.ली. प्रति हेक्टेयर प्रभावकारी है।
  • छिड़काव हमेशा शाम के समय करना चाहिए।
खरपतवार प्रबंधन :-
  • फसल समय पर बोना चाहिए, पर्याप्त नमी, अनुमोदित बीज दर,संतुलित उर्वरक जिससे पौध संख्या हो और स्वास्थ पौधा बने जो प्रांरभिक अवस्था में नींदा से मुकाबला कर सके।
  • बोनी के 45 दिन बाद तक फसल को खरपतवार से मुक्त रखना चाहिए और हाथ से या 'हो' से खरपतवार उखाड़ देना चाहिए।
  • खेत की साफ सफाई समय समय पर करें।
  • नाइट्रोजन का अत्याधिक उपयोग न करें।
  • उर्वरकों की संतुलित मात्रा का उवयोग करें।
  • गहरी जुताई करें।
  • प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करें।
  • सरसों की फसल विभिन्न अवस्थाओं में अलग अलग कीटों जैसे सोलाई, चितकबरा कीट, फुदका और रोग जैसे सफेद किटट्, हरिम आसिता, मृदुरोमिल आसिता, चुर्णित आसिता से प्रभावित होती है। एकाकीकृत कीट प्रबंधन को अपनाने से रसायन के मुल्य में कमी आती है और नियंत्रण भी होगा। निम्नलिखित क्रियाओं से लागत कम हो सकती है।
  • रोग से मुक्त फसल के बीजों का उपयोग करना चाहिए।
  • रोग और कीट प्रतिरोधक किस्मों का उपयोग करना चाहिए।
  • क्षेत्र के बोनी समय पर ही बोनी करनी चाहिए। उत्तर भारत में यदि बोनी अक्टूबर के मध्य की हो तो रोग व कीट नही लग पाते।
  • मिट्टी में कीट संकुल बनने से बचाने के लिए फसल चक्र अपनाना चाहिए।
  • बीज को किसी अच्छे फंफूदनाशक से उपचारित करना चाहिए।
  • क्लब रूट रॉट से बचाव के लिए सिंचाई निंयत्रित होनी चाहिए।
  • बीज के बनने के पूर्व ही परजीवी पौधों को उखाड़ कर नष्ट करें। परजीवी के बीज कई वर्षो तक जीवित रहते है इसलिए परजीवी की भोज्य फसलें दो तीन साल तक नहीं उगाना चाहिए। खेत को स्वच्छ रखे जिससे कीट की समस्या कम हो।
  • सरसों की सोलाई की संख्या नियंत्रित करने के लिए समय पर सिंचाई करनी चाहिए।
  • फसल की जल्दी से जल्दी छटाई करनी चाहिए और पौधों के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए।
  • लीफ माइनर से ग्रसित पत्तियों को तोड़कर जला देना चाहिए जिससे उनमें रहने वाले लार्वा या प्यूपा मर जाए। बिहारी इल्ली के नियंत्रण के लिए यांत्रिक विधियों को अपनाना चाहिए।
  • फसल पर छिड़काव तभी करें जब फुदका आर्थिक देहली स्तर को पार कर ले। फुदका के लिए आर्थिक देहली स्तर 28-29 फुदका प्रति 10 से.मी. है।
  • सही समय पर रोपणी करनी चाहिए। सही समय पर बोनी से सरसों की उपज में काफी बढ़ोतरी होती है।
  • ये फसल संवेदनशील होती है और समय पर रोपण करने से फसल को विकास की अवस्था में अनुकूल तापमान मिलता है।
  • देर से बोनी करने से उपज में जो कमी होती है वो नत्रजन की ज्यादा मात्रा से भी पूरी नहीं हो सकती है। देर से बोनी से बीज कम होते है।