विभागीय परिपत्रों का संकलन

संचालनालय

कृषि अभियांत्रिकी, मध्य प्रदेश

भोपाल के विभागीय परिपत्रो का संकलन

 
मध्य प्रदेश  शासन -  कृषि विभाग

क्रमांक / बी -  3 - 30 / 2000 / 14 - 2                               भोपाल दिनांक 31 अगस्त 2001 

आदेश क्रमांक - 1 / कृषि अभियांत्रिकी

प्रति

  1. कलेक्टर, (समस्त) मध्यप्रदेश
  2. मुख्य कार्यपालन अधिकारी (समस्त) जिला पंचायत मध्यप्रदेश
  3. आंचलिक प्रबंधक कृषि जलवायु क्षेत्र (समस्त) मध्यप्रदेश
  4. उपसंचालक कृषि (समस्त) मध्यप्रदेश
  5. कृषि यंत्री (समस्त) मध्यप्रदेश
  6. सहायक कृषि यंत्री (समस्त) मध्यप्रदेश
  7. मुख्य कार्यपालन अधिकरी जनपद पंचायत विकासखंड मध्यप्रदेश
  8. अनुविभागीय कृषि अधिकारी (समस्त) मध्यप्रदेश
  9. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (समस्त) मध्यप्रदेश

विषयः- केन्द्र प्रवर्तित कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहित करने की योजना-मैक्रो मेनेजमेन्ट के क्रियान्वयन संबंधी मार्गदर्शी निर्देश वर्ष 2001-2002

1. कृषि विभाग के द्वारा क्रियान्वित केन्द्र प्रवर्तित कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहित करने की योजना-मैक्रो मेनेजमेन्ट के क्रियान्वयन में त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया मार्गदर्शी आदेश क्रमांक बी-3-30 / 2000 /14-2 दिनांक 11 दिसंबर 2000 एतद द्वारा अधिक्रमित किया जाता है।

2. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज व्यवस्था के अन्तर्गत ग्राम की भूमिका कृषि संबंधी कर्तव्यों के निर्वहन हेतु सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह मार्गदर्शी निर्देश जारी किये जा रहे हैं।
 

3. कार्यक्रम का विवरणः

यह केन्द्र प्रवर्तित कार्यक्रम है। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषकों को यंत्रीकरण हेतु प्रोत्साहित कर यांत्रिकी खेती को बढ़ावा देकर कृषि उत्पादन बढ़ाने और श्रम समय तथा धन की बचत करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से कृषकों को विभिन्न प्रकार के उन्नत कृषि यंत्रों छोटे ट्रेक्टर पावर टिलर तथा शक्ति चलित कृषि उपकरणों के क्रय पर अनुदान दिये जाने का प्रावधान है।

4. कार्यक्रम का  कार्यक्षेत्रः-

कार्यक्रम प्रदेश के समस्त 45 जिलों में लागू है।

 
5. कार्यक्रम का  घटकः-
कार्यक्रम के अंतर्गत निम्नानुसार तीन घटक है, जिनके क्रियान्वयन में जिला पंचायत की भूमिका रहेगीः
1. हस्तचलित, बैलचलित उन्नत कृषि यंत्र
2. शक्तिचलित उन्नत कृषि यंत्र
3. पावर टिलर एवं 30 पी.टी.ओ. हार्सपावर तक के टेªक्टर
 
6. वित्तीय व्यवस्थाः-

संचालक कृषि अभियांत्रिकी जिले के उपसंचालक कृषि को कार्यक्रम क्रियान्वयन के लिए वित्तीय स्वीकृति के अनुरूप भौतिक लक्ष्य जारी करेंगें। हस्तचलित बैलचलित तथा शक्तिचलित कृषि यंत्रों के लिए अनुदान राशि उप संचालक कृषि को आबंटित की जायेगी तथा शेष घटकों की अनुदान राशि मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम को प्रदाय की जावेगी।

 
7. लक्ष्यों का निर्धारण:-

1. संचालक कृषि अभियांत्रिकी कार्यक्रम के प्रावधान अनुसार जिलों की विगत वर्षो की प्रगति एवं जिलों की मांग को ध्यान में रखकर जिलों का कार्यक्रम निर्धारित करेगें।

2. जिला पंचायतः
उप संचालक कृषि लघु, सीमांत, अ.जा., अ.ज.जा. एवं सामान्य कृषकों की जिले की संख्या एवं पूर्व वर्षो की प्रगति के आधार पर लक्ष्यों का विभाजन विकासखण्ड वार करेंगे तथा इसका अनुमोदन जिला पंचायत की कृषि स्थायी समिति से करायेंगे।

1. लक्ष्यों के विभाजन एवं अनुमोदन उपरांत इसकी सूचना उप संचालक कृषि द्वारा अनुविभागीय कृषि अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत को दी जायेगी।

2. पावर टिलर शक्तिचलित उन्नत कृषि यंत्र एवं 30 पी.टी.ओ. हार्सपावर तक के ट्रेक्टरो के लक्ष्यों का विभाजन विकास खण्ड स्तर तक ही रहेगा। इन घटको के क्रियान्वयन में *प्रथम आये प्रथम पाये* के सिद्धांत का पालन किया जावे। 

3. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी हस्तचलित / बैलचलित उन्नत कृषि यंत्रों के लक्ष्य का विभाजन ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारीवार करेंगे तथा इसकी सूचना वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा उप संचालक कृषि, अनुविभागीय अधिकारी कृषि एवं संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को दी जावेगी।  

3. ग्रामसभाः

1. ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी हस्तचलित / बैलचलित कृषि यंत्रों के लिये प्राप्त लक्ष्यों का विभाजन अपने कार्यक्षेत्र में ग्राम सभावार करेंगे।

2. लक्ष्यों के विभाजन में उन ग्रामों को प्राथमिकता दी जावे, जहां इस कार्यक्रम से कृषक पूर्व वर्षो में लाभांन्वित ना हुए हों।

3. ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा हितग्राहियों का चयन लक्ष्य से दो गुनी संख्या में किया जावे तथा हितग्राहियों की सूची का अनुमोदन ग्रामसभा की कृषि स्थायी समिति से प्राप्त किया जावेगा।

4. ग्रामसभा से प्राप्त अनुमोदित सूची ग्रा. कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को प्रस्तुत की जायेगीं।

5. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा ग्रामसभा द्वारा अनुमोदित सूचियाँ उप संचालक कृषि को सूचनार्थ भेजी जावेगी।

6. इस अनुमोदित सूची से कार्यक्रम का क्रियान्वयन होगा। यह सूची तब तक मान्य एवं अगले वित्तीय वर्ष में प्रभावी रहेगी जब तक उसमें सम्मिलित सभी नामों पर स्वीकृति न हो जाय अथवा अगले वर्ष की सूची इसी प्रक्रिया से तैयार न हो जाय, जो भी पहले हो। 

4. हितग्राही का चयन केवल एक स्तर की पंचायत की कृषि स्थायी समिति द्वारा किया जायेगा। इस व्यवस्था में फेरबदल का अधिकार किसी को नहीं होगा।

 
8. हितग्राही चयन, अनुमोदन एवं क्रियान्वयनः-
8.1. हस्तचलित / बैलचलित उन्नत कृषि यंत्र

8.1.1. हितग्राही चयन एवं अनुमोदन
1. सभी श्रेणी के कृषको को उन्नत कृषि यंत्र प्राप्त करने की प्रात्रता होगी। लघु सीमांत, अ.जा., अ.ज.जा. एवं महिला      कृषकों को प्राथमिकता दी जावें।
2. ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी विगत वर्ष से डेढ़ गुना संख्या में हितग्राहियों की सूची तैयार करेंगे।
3. पूर्व वर्षों में लाभांन्वित कृषकों के नाम सूची में शामिल नहीं किये जावें।
4. हितग्राही सूची में अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लघु तथा सीमांत कृषकों के नाम सबसे ऊपर रहेंगें    तथा यह सूची ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को प्रेषित की जायेगी।
5. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, सूची उप संचालक कृषि को अनुदान स्वीकृति हेतु प्रेषित करेंगे।

8.1.2. क्रियान्वयन
1. उप संचालक कृषि जिले मे उन्नत कृषि यंत्रो के प्रदाय की व्यवस्था मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम/कृषि   अभियांत्रिकी संचालनालय के माध्यम से करायेंगे।
2. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी की मांग अनुसार विकासखंड मुख्यालय सहकारी समितियों में उन्नत कृषि यंत्रो का    भण्डारण उपरोक्त संस्थाओं द्वारा कराया जायेगा। 
3. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कृषि विकास अधिकारी तथा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकरी अनुमोदित हितग्राहियों से    कृषक अंश राशि प्राप्त कर संबंधित प्रदायक संस्थाओं अथवा सहकारी समितियों में जमा करायेगें।
4. संबंधित संस्था कृषक अश प्राप्त होने के 15 दिन में अनिवार्य रूप से कृषकों को वांछित यंत्र उपलब्ध करायेगी। 
5. सहकारी समिमियाँ ऋण पर भी पर भी सदस्य कृषकों को उन्नत कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध करायेगी।
6. सहकारी समितियों का यह दायित्व होगा कि वह कृषक के ऋण खाते से कृषक अंश की राशि स्वीकृत कर प्रदायक    संस्था को तुरंत प्रदान करें तथा सूचना अनुविभागीय कृषि अधिकारी एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को दें।  
7. प्रदायक संस्थाए कृषकों को कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के बाद कृषकवार अनुदान राशि की मांग निर्धारित प्रपत्र में    वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से सत्यापन कराने के उपरांत उप संचालक कृषि को प्रेषित करेंगी।
8. उप सचालक कृषि अनुदान राशि स्वीकृत कर भुगतान संबंधित संस्था को करेगें। 
9. तिलहन उत्पादन कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय दलहन विकास परियोजना कार्यक्रम के उन्नत कृषि यंत्रों का घटक इस    योजना में सम्मिलित नही है।
10. उन्ही उन्नत कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जावेगा जिनकी सूची संचालक कृषि अभियांत्रिकी द्वारा जारी की जावेगी   
11. भिन्न-भिन्न क्रियाकलापों के लिए कृषक को एक से अधिक यंत्रों पर भी अनुदान दिया जा सकेगा।
12. निर्धारित वित्तीय लक्ष्य से अधिक यंत्रो का वितरण संचालक कृषि अभियांत्रिकी की पूर्व अनुमती के बिना नहीं किया     जावेगा अन्यथा वितरित अनुदान राशि उप संचालक कृषि से वसूल की जावेगी।    
13. अनुदान की दरों का विवरण परिशिष्ट एक में दर्शित है।

8.2. शक्तिचलित उन्नत कृषि यंत्र

8.2.1. हितग्राही चयन एवं अनुमोदन
1. सभी श्रेणी के कृषको को उन्नत कृषि यंत्र अनुदान पर प्राप्त करने की पात्रता होगी बशर्ते उसने पूर्व वर्ष में किसी भी    अन्य योजना में उस पर लाभ न लिया हो।
2. लघु सीमांत अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जावें।
3. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी प्रत्येक माह प्राप्त प्रकरणों की सूची मय प्रकरण के उप संचालक कृषि को प्रस्तुत    करेंगें।
4. उप संचालक कृषि, प्राप्त प्रकरणों का जिला स्तर पर परीक्षण कर जिला पंचायत की कृषि स्थायी समिति से       अनुमोदन उपरांत अनुदान की पात्रता अनुसार प्रकरण स्वीकृत करेगें। 
5. बैंक ऋण पर उन्नत कृषि यंत्र क्रय करने वाले कृषकों के प्रकरण अनुदान आदेश के साथ आवेदन में उल्लेखित बैंक    को उप संचालक कृषि द्वारा प्रेषित किये जायेगें।
6. प्रकरण प्राप्त होने पर बैंक द्वारा अनुदान अंश को छोडकर शेष ऋण राशि स्वीकृत कर मप्र राज्य कृषि उद्योग    विकास निगम की जिला शाखा को उन्नत कृषि यंत्र के प्रदाय का आदेश दिया जावेगा।  
7. नगद पर उन्नत कृषि यंत्र क्रय करने वाले कृषकों के प्रकरण कृषक हिस्से की राशि सहित मप्र राज्य कृषि उद्योग    विकास निगम की जिला शाखा को प्रेषित किये जायेगें।
8. योजना के अन्तर्गत विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के अतिरिक्त मप्र राज्य कृषि उद्योग विकास निगम    द्वारा भी प्रकरण तैयार किये जा सकेगें। यह सभी प्रकरण जिले के उप संचालक कृषि को जिला पंचायत की कृषि    स्थायी समिति से अनुमोदन हेतु प्रेषित किये जायेगें।   
9. मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम की यह जबावदारी होगी कि वह अनुदान अंश को छोडकर शेष राशि    बैंक/कृषक से प्राप्त होते ही हितग्राही 8 कृषक को 15 दिवस के अन्दर उन्नत कृषि यंत्र प्रदाय करें एवं कृषकवार
   अनुदान राशि के समायोजन की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से सत्यापन करने के    उपरांत उप संचालक कृषि को प्रेषित करें।
10. उन्ही उन्नत कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जावेगा जिनकी सूची संचालक कृषि अभियंत्रिकी द्वारा जारी की जावेगी।
11. भिन्न-भिन्न क्रियाकलापों के लिए कृषकों को एक से अधिक कृषि यंत्रों पर भी अनुदान दिया जा सकेगा।
12. ट्रेक्टर चलित कृषि यंत्र के लिए अनुदान की पात्रता उसी कृषक को होगी, जिसके पास ट्रेक्टर हो।
13. निर्धारित वित्तीय लक्ष्य से अधिक यंत्रों का वितरण संचालक कृषि अभियांत्रिकी की पूर्व अनुमति के बिना नहीं किया     जावेगा अन्यथा वितरित यंत्र की अनुदान राशि उप संचालक कृषि से वसूल की जावेगी।
14. अनुदान की दरों का विवरण परिशिष्ट एक में दर्शित है।  

8.2.2. तकनीकी सावधानियाँ:-
1. तकनीकी जानकारी मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम द्वारा दी जावेगी।
2. आवेदन पत्र पर कृषक का फोटो लगाया जाना अनिवार्य होगा जो गांव के सरपंच या वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से    प्रमाणित होना चाहिए।
3. प्रदायक संस्था द्वारा कृषक को विक्रय पश्चात सेवा की गारंटी दी जावेगी।
4. विक्रय उपरांत सेवा एवं स्पेयर पार्ट की पूर्ति की जिम्मेदारी कृषि उद्योग विकास निगम की होगी।

 

8.3. पावर टिलर :-

8.3.1. हितग्राही चयन एवं अनुमोदन
1. सभी श्रेणी के कृषकों को पावर टिलर के लिये अनुदान की पात्रता होगी बशर्ते उसने पूर्व वर्ष में पावर टिलर पर    अनुदान का लाभ न लिया हो।
2. लघु, सीमांत, अनुसुचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जावे।
3. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी प्रत्येक माह प्राप्त प्रकरणों की सूची मय प्रकरण के उप संचालक कृषि को प्रस्तुत    करेंगे।
4. उप संचालक कृषि प्राप्त प्रकरणों का जिला स्तर पर परीक्षण कर जिला पंचायत की कृषि स्थायी समिति से    अनुमोदन उपरांत अनुदान की पात्रता अनुसार प्रकरण स्वीकृत करेगें।
5. बैंक ऋण पर पावर टिलर क्रय करने वाले कृषकों के प्रकरण अनुदान आदेश के साथ आवेदन में उल्लेखित बैंक को    उप संचालक कृषि द्वारा प्रेषित किये जायेगें।
6. प्रकरण प्राप्त होने पर बैंक द्वारा अनुदान अंश को छोडकर शेष ऋण राशि स्वीकृत कर मप्र राज्य कृषि उद्योग    विकास निगम की जिला शाखा को पावर टिलर के प्रदाय का आदेश दिया जावेगा।
7. नगद पर पावर टिलर क्रय करने वाले कृषकों के प्रकरण हिस्से की राशि सहित मप्र राज्य कृषि उद्योग विकास    निगम की जिला शाखा को प्रेषित किये जायेंगे।
8. योजना के अंतर्गत विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के अतिरिक्त मप्र राज्य कृषि उद्योग विकास निगम       द्वारा भी प्रकरण तैयार किये जा सकेगें। यह सभी प्रकरण जिले के उप संचालक कृषि को जिला पंचायत की कृषि    स्थायी समिति से अनुमोदन हेतु पे्रषित किये जायेंगे।
9. मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम की यह जवाबदारी होगी कि वह अनुदान अंश को छोडकर शेष राशि    बैंक/कृषक से प्राप्त होते ही हितग्राही कृषक को 15 दिवस के अन्दर पावर टिलर प्रदाय करें एवं कृषकवार अनुदान    राशि के समायोजन की जानकारी निर्धारित प्रपत्र में, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से सत्यापन करने के उपरांत उप    संचालक कृषि को प्रेषित करे।
10. अनुदान की दर का विवरण परिशिष्ट “एक” में दर्शित है।

8.3.2. तकनीकी सावधानियाँ:-
1. भारत शासन द्वारा अनुमोदित “मेक” के ही पावर टिलर मय रोटावेटर वितरित किये जावेंगे, जिनकी सूची परिशिष्ट    “दो” पर है।
2. कृषक उक्त सूची में से ही अपनी पसंद के मेक के पावर टिलर की मांग करेगें तथा म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास    निगम का दायित्व होगा कि वह कृषक द्वारा चाहे गये “मेक” का ही पावर टिलर प्रदाय करें।
3. तकनीकी जानकारी मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम द्वारा दी जावेगी।
4. आवेदन पत्र पर कृषक का फोटो लगाया जाना अनिवार्य होगा जो गांव के सरपंच या वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से    प्रमाणित होना चाहिए।
5. प्रदायक संस्था द्वारा कृषक को विक्रय पश्चात सेवा की गारंटी दी जावेगी।
6. विक्रय उपरांत सेवा एवं स्पेयर पार्टस की पूर्ति की जिम्मेदारी कृषि उद्योग विकास निगम की होगी।
7. निर्धारित लक्ष्य से अधिक पावर टिलर का वितरण संचालक कृषि अभियंत्रिकी की पूर्व अनुमति के बिना नहीं की    जावेगा अन्यथा वितरित अनुदान राशि उप संचालक कृषि से वसूल की जावेगी।

8.4. 30 पी.टी.ओ. हॉर्सपावर तक के ट्रेक्टर :-

8.4.1. हितग्राही चयन एवं अनुमोदन
1. अनुदान की पात्रता उन कृषकों को होगी जिनके स्वयं या उनके परिवार के पास पूर्व से कोई ट्रेक्टर नही हो।
2. कृषक समूहों को भी अनुदान की पात्रता होगी।
3. पंजीकृत सहकारी समितियों, कृषि साख समितियों एवम् बहुउद्देशीय कृषि समितियों को भी अनुदान की पात्रता होगी।    प्रत्येक पात्र समिति को तीन से अधिक ट्रेक्टर पर अनुदान नहीं दिया जायेगा।
4. बैंक ऋण से ही ट्रेक्टर क्रय करने पर अनुदान दिया जावेगा।
5. योजना के अन्तर्गत विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के अतिरिक्त मप्र राज्य कृषि उद्योग विकास निगम    द्वारा श्री प्रकरण तैयार किये जा सकेगें। यह 11 सभी प्रकरण जिले के उप संचालक कृषि को जिला पंचायत की    कृषि स्थायी समिति से अनुमोदन हेतु प्रेषित किये जायेंगे।
6. मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम से टैªक्टर क्रय करने पर ही अनुदान का लाभ दिया जावेगा।
7. शेष शर्ते कंडिका 8.3.1 के अनुसार निर्धारित लक्ष्य से अधिक ट्रैक्टरांे का वितरण कृषि अभियांत्रिकी की पूर्व    अनुमति के बिना नहीं किया जावेगा अन्यथा वितरित अनुदान राशि उपसंचालक कृषि स वसूल की जावेगी।
8. अनुदान की दर का विवरण परिशिष्ट “एक” पर दर्शित है।

8.4.2. तकनीकी सावधानियाँ:-
1. भारत सरकार द्वारा अनुमोदित मेक के ही टेªक्टर वितरित किये जावेगें जिनकी सूची परिशिष्ट “तीन” पर है।
2. कृषक उक्त सूची में से ही अपनी पसंद के मेक के ट्रेक्टर की मांग करेगें तथा म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास    निगम का दायित्व होगा कि कृषक चाहे गये ‘मेक’ का ही टेªक्टर प्रदाय करें।
3. शेष शर्ते कंडिका 8.3.2 के अनुसार

 
9. निरीक्षण एवं अनुश्रवणः-

उन्नत कृषि यंत्र के वितरण उपरांत कृषि यंत्रो की उपयोगिता के बारे मे कृषकों को जानकारी देने हेतु वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी/अनुविभागीय कृषि अधिकारी/सहायक कृषि यंत्री/यांत्रिक सहायक स्थल भ्रमण करेगें तथ अधिकाधिक कृषकों को उन्नत कृषि यंत्रो के उपयोग की समझाईश देगें।

ट्रेक्टर तथा पावर टिलर के प्रदाय उपरांत उसकी उपयोगिता के बारे मे तथा परिचालन के बारे में जानकारी देने हेतु जिला प्रबंधक, म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास निगम/सहायक कृषि यंत्री/यांत्रिक सहायक स्थल भ्रमण करेगें तथा कृषकों को ट्रेक्टर / पावर टिलर के परिचालन सम्बन्धी समझाईश देगें। इसके 12 उपयोग में ली जाने वाली सावधानियों से भी कृषक को अवगत करावेगें तथा तकनीकी कठिनाईयाँ आने पर उनका निराकरण करावेंगे।

 
10. भौतिक सत्यापनः
विभिन्न घटकों के प्रदाय/वितरण उपरांत भौतिक सत्यापन का उत्तरदायित्व निम्नानुसार होगाः-

1. उप सचालक कृषि 5
2. वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी/50 यांत्रिकी सहायक
3. जिलास्तरीय विषयवस्तु विशेषज्ञ/25:- सहायक कृषि यंत्री
4. कृषि विकास अधिकारी/ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी 100:
5. अनुविभागीय कृषि अधिकारी/ अनुविभाग स्तरीय विषय विशेषज्ञ 25:

 
11. व्ययः-
योजनान्तर्गत प्राप्त आबंटन का उपयोग करने हेतु उपलब्ध राशि कंडिका 6.1 के अनुरूप मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम/जिलों के उप संचालक कृषि को दी जावेगी।

समस्त घटकों पर भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य के अनुसार व्यय वर्ष की वर्ष की 31 जनवरी तक सुनिश्चित किया जावेगा।

आवंटन का जिले में पूरा व्यय नही होने की स्थिति में भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्यों को अन्य जिले को पुनः आवंटित करने हेतु संचालक कृषि अभियांत्रिकी स्वतंत्र होंगे।

उप संचालक कृषि नियमित रूप से कार्यक्रम का घटकवार प्रगति प्रतिवेदन एवं मासिक व्यय पत्रक संचालक कृषि अभियांत्रिकी एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को प्रेषित करेंगे। साथ में घटकवार भुगतान हेतु लंबित राशि की जानकारी भी भेजेंगे।

12. समयबद्ध कार्यक्रम (कट आफ डेट्स) परिशिष्ट-“चार” में दर्शित है।

13. समय-समय पर उन्नत कृषि यंत्रों, पावर टिलर्स तथा ट्रेक्टर की सूची में क्षेत्र की आवश्यकता तथा नवीन अनवेषणों के आधार पर संचालक कृषि अभियांत्रिकी संशोधन कर सकेंगे।

14. इस कार्यक्रम के अतिरिक्त राष्ट्रीय जल ग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत भी कृषि उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से उन्नत कृषि यंत्र/उपकरण के प्रचार-प्रसार व उपयोग बढ़ावा देने के लिए कृषि यंत्रों एवं उपकरणों को स्व-सहायता समूहों एवं वाटर शेड कमेटी के माध्यम से किराये पर प्रदाय करने का प्रावधान रखा गया है। इसके संबंध में मार्गदर्शी निर्देश विभग के ज्ञाप क्रमांक/एस.सी./एन.डब्लु/एन-2/98-99/1171 दिनांक 19.05.99 से जारी किए गये है। इस निर्देश के अनुसार जल ग्रहण क्षेत्र के आकार के आधार पर 2000 हेक्टेयर उपचार योग्य क्षेत्र तक के जल ग्रहण क्षेत्र हेतु रूपये 50000/- तथा इससे ज्यादा उपचार योग्य क्षेत्रफल के जल ग्रहण क्षेत्र हेतु रूपये 75000/- तक के उपकरण कस्टम हायर हेतु बारानी चेतना केन्द्र में रखे जा सकेगे। कस्टम हायर की इस व्यवस्थ में पोस्ट हारवेस्ट उपकरणों जैसे राइस हलर /मिनी राइस मिल, दाल मिल तथा सीड ग्रेडर को प्रोत्साहित किया जाये।

15. कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायकत, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत उप संचालक कृषि एवं उनके अधिनस्थ अधिकारी कार्यक्रम में दिए गए मार्गदर्शी निर्देशो के अनुरूप क्रियान्वयन हेतु समय पर कार्यवाही की जाना सुनिश्चित करेंगे।

 
  हस्ताक्षर
(ओ.पी.रावत.)
सचिव
मध्यप्रदेश शासन
कृषि विभाग
 
पृ.क्र. / बी -  3 - 30 / 2000 / 14 - 2                               भोपाल दिनांक 31 अगस्त 2001 
प्रतिलिपि:-

1. सचिव, माननीय मुख्यमंत्री जी, म.प्र. शासन, भोपाल।
2. निजी सचिव, माननीय मंत्री जी, कृषि विभाग, म.प्र. शासन, भोपाल।
3. निजी सचिव, माननीय राज्य मंत्री जी, कृषि म.प्र. शासन, भोपाल।
4. स्टाफ आफीसर, मुख्य सचिव, म.प्र. शासन, भोपाल।
5. अध्यक्ष, जिला पंचायत (समस्त) मध्यप्रदेश ।
6. कृषि उत्पादन आयुक्त, म.प्र. शासन, भोपाल ।
7. प्रमुख सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, म.प्र. शासन, भोपाल।
8. संचालक कृषि, मध्यप्रदेश, भोपाल।
9. संचालक कृषि अभियांत्रिकी, गौतम नगर, आफिस काम्पलेक्स, भोपाल ।
10. संचालक उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी, म.प्र. भोपाल।
11. संभागीय आयुक्त, मध्यप्रदेश (समस्त)।
12. प्रबंध संचालक, म.प्र. राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम, भोपाल ।
13. प्रबंध संचालक म.प्र. राज्य कृषि उ़द्योग विकास निगम, भोपाल।
14. प्रबंध संचालक. म.प्र. राज्य सहकारी बैंक मर्यादित , भोपाल।
15. अपर संचालक/संयुक्त संचालक/उपसंचालक/सहायक संचालक, कृषि संचालनालय, मध्यप्रदेश भोपाल।
16. संचालक विस्तार/अनुसंधान सेवायें, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय , जबलपुर ।
17. प्रबंध संचालक, म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ, भोपाल । 18. संपादक, पंचायिका , मध्यप्रदेश , माध्यम, भोपाल 19. अपर संचालक कृषि/संयुक्त संचालक कृषि/उप संचाललक कृषि/ सहायक संचालक कृषि (समस्त) संचालनालयीन।

 
  हस्ताक्षर
सचिव
मध्यप्रदेश शासन
कृषि विभाग
 
संचालनालय कृषि अभियांत्रिकी
आफिस काम्पलेक्स ‘बी‘ ब्लाक, गौतम नगर,भोपाल
क्रमांक/ के.जी./3/2006/552 भोपाल,                                          दिनांक 13 अप्रेल, 2006
 

प्रति

  1. उपसंचालक कृषि (समस्त) मध्यप्रदेश
  2. कृषि यंत्री (समस्त) मध्यप्रदेश
  3. सहायक कृषि यंत्री (समस्त) मध्यप्रदेश

विषयः-  मैको मेनेजमेन्ट योजना के अन्तर्गत कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन कार्यक्रम का क्रियान्वयन वर्ष 2006-2007

सदर्भ: म.प्र. शासन कृषि विभाग का आदेश क्रमांक बी-3-30/2001/14-2 दिनांक 31.8.01

मैक्रो मेनेजमेन्ट योजना के अन्तर्गत क्रियान्वित “कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन” कार्यक्रम के मार्गदर्शी निर्देश उपरोक्त सन्दर्भित पत्र से आपकी ओर भेजे गये हैं एवं इसमें समय-समय पर हुये संशोधन/परिवर्तन से भी आपको अवगत कराया गया हैं।

2. इस कार्यक्रम के अन्तर्गत निम्नानुसार घटकों को सम्मिलित किया गया है-

  • हस्तचलित, बैलचलित उन्नत कृषि यंत्र/हार्टीकल्चर टूल्स पर अनुदान।
  • शक्तिचलित उन्नत कृषि यंत्र पर अनुदान।
  •  पावर टिलर क्रय पर अनुदान ।
  • हस्तचलित, बैलचलित उन्नत कृषि यंत्र/हार्टीकल्चर टूल्स पर अनुदान।
  • 35 पी.टी.ओ. हार्सपावर तक के टेªक्टर क्रय पर अनुदान।
  •  पोस्ट हार्वेस्ट उपकरण जैसे-मिनी राइस मिल, सीड ग्रेडर के क्रय पर  अनुदान।

3. इन सभी घटकों को समेकित करते हुये वर्ष 2006-07 के लिए भौतिक लक्ष्य निर्धारित कर जिलेवार एवं यंत्रवार विवरण परिशिष्ट-1 से परिशिष्ट-4 के साथ संलग्न है।

इन घटकों पर सभी वर्ग के कृषकों को निम्नानुसार अनुदान की पात्रता होगी:
क्रमांक

कृषि यंत्र/उपकरण का नाम

अनुदान की दर

रिमार्क

1. ट्रेक्टर कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम
रू. 30,000/- में से जो भी कम हो।
35 पी.टी.ओ हार्स पावर तक के।
2. पावर टिलर कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम
रू. 30,000/- में से जो भी कम हो।
8 बी.एच.पी तक एवं उससे अधिक।
3. सेल्फ प्रोपेल्ड रीपर पैडी ट्रान्सप्लांटर शक्तिचलित कृषि
उपकरण
कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम
रू. 30,000/- में से जो भी कम हो।
 
4. शक्ति चलित विशिष्ट कृषि उपकरण जैसे-जीरो टिलेज सीड ड्रिल,सीड गे्रडर मोटर सहित, रोटावेटर, शुगरकेन कटर प्लांटर, पोटेटो डिगर/पोटेटो प्लांटर, टैक्टर चलित फ्रंट
माउण्टेड रीपर, स्ट्रा रीपर, मिनी राईस मिल, मेज शेलर, इन्क्लाइन्ड प्लेट प्लांटर, टिलप्लान्टर
कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम
रू. 20,000/- में से जो भी कम हो।
 
5. हस्तचलित कृषि यंत्र / हार्टीकल्चर टुल्स कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम रू. 2,000/- में से जो भी कम हो।  
6. बैल चलित कृषि यंत्र कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम
रू. 2,000/- में से जो भी अधिकतम
 
7. ट्रेक्टर/पावर टिलर शक्ति चलित कृषि यंत्र कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम
रू. 10,000/- मे से जो भी कम हो।
 
8. पावर थ्रेसर, (सभी प्रकार के) कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम 17
रू. 10,000/- में से जो भी कम हो।
 
9. एरो ब्लास्ट स्प्रेयर कीमत का 25 प्रतिशत अधिकतम
रू. 30,000/- में से जो भी कम हो।
 
 

4. कृषि यंत्रों एवं पावर टिलर की अनुदान राशि जिले के उप संचालक कृषि को आबंटित की जावेगी। कृषि यंत्रों एवं पावर टिलर का वितरण वित्तीय प्रावधान की सीमा तक किया जावे। यह उल्लेखनीय है कि राज्य शासन के निर्देश है कि लकड़ी के बने कृषि यंत्रों के उपयोग को हतोत्साहित करने हेतु लोहे के बने हुये उन्नत कृषि यंत्रों को प्रोत्साहित करने की कार्यवाही की जावे। अतः यह कार्यक्रम बहुत ही महत्वपूर्ण माना जावे। यंत्रों के साथ-साथ लोहे की बीम का प्रदाय अधिकाधिक किया जावे। योजनाओं में चयनित उन्नत कृषि यंत्रों की सूची, दर सहित ट्रेक्टर एवं पावर टिलर के अनुमोदित मॉडल की सूची त्वरित सन्दर्भ हेतु साथ में संलग्न है। इन पर ही अनुदान स्वीकृत किया जावेगा।

5. शक्तिचलित कृषि यंत्रों के लिये आपको दिये गये यंत्रों का ही वितरण किया जावे एवं उपलब्ध आबंटन अन्तर्गत इनकी संख्या में फेरबदल मान्य किया जा सकता है। यद्यपि यंत्रों के लक्ष्य का विभाजन जिले में यंत्रों की उपयोगिता एवं कृषकों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर किया गया है, फिरभी ऐसे यंत्र जिनका लक्ष्य आपके जिले को नही दिया गया है, परन्तु कृषकों में इनकी मांग हो तो तदनुसार उनका भी वितरण किया जा सकता है।

6. बैलचलित कृषि यंत्रों का प्रदाय म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास निगम एवं कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के माध्यम से होगा। पावर टिलर्स एवं शक्तिचलित कृषि यंत्रों का प्रदाय म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास निगम एवं म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ के माध्यम से होगा। योजना अन्तर्गत वितरित होने वाले टैक्टरों का प्रदाय भी मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम के माध्यम से होगा एवं इसके लिये अनुदान राशि निगम को पृथक से संचालनालय से प्रदाय की जावेगी।

7. जिन हितग्राहियों के पास ट्रैक्टर उपलब्ध हो, उन्ही हितग्राहियों को ट्रैक्टर चलित उपकरणों के लिये अनुदान स्वीकृत किया जावे। यह ध्यान रखा जावे कि 18 हितग्राहियों के पास उपलब्ध ट्रैक्टर के हार्स पावर के अनुरूप ही ट्रैक्टर चलित कृषि यंत्र/उपकरण का प्रदाय हो।

लक्ष्य का विभाजन विकासखण्डवार/यंत्रवार किया जाकर अधीनस्थों को लक्ष्य पूर्ति हेतु उत्तरदायी बनाया जावे। यंत्रों के निर्माण एवं भण्डारण हेतु पर्याप्त समय एग्रो/विपणन संघ/कृषि अभियांत्रिकी को मिल सके, इसके लिये आवश्यक है कि यंत्रों की अग्रिम मांग एकत्रित कर संयुक्त हस्ताक्षर सहित इन संस्थाओं को 20 मई, 2006 तक उपलब्ध करा देवे। प्राप्त बजट आबंटन के अनुरूप ही, कृषि यंत्रों का वितरण एक बारहमासी कार्यक्रम समझकर इसकी पूर्ति के प्रयास किये जावें। योजना की प्रगति से प्रतिमाह संचालनालय को नियमित रूप से अवगत कराया जावे।

संलग्न उपरोक्तानुसार। हस्ताक्षर
संचालक, कृषि अभियांत्रिकी
मध्यप्रदेश, भोपाल
 
क्रमांक/के.जी./3/2005/553 भोपाल,                                            दिनांक अप्रैल, 2006
प्रतिलिपि:-

1. सचिव, म.प्र. शासन, कृषि विभाग, मंत्रालय, भोपाल।
2. पंजीयक एवं सहकारिता आयुक्त, विन्ध्याचलय भवन, भोपाल।
3. संचालक कृषि, मध्यप्रदेश भोपाल।
4. संचालक उद्यानिकी एवं प्रेक्षत्र वानिकी, म.प्र. भोपाल।
5. प्रबंध संचालक, म.प्र. राज्य कृषि उ़द्योग विकास निगम पंचानन भवन, भोपाल।
6. प्रबंध संचालक, म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ, मर्यादित भोपाल।
7. प्रबंध संचालक, म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ, मर्यादित भोपाल।
8. आंचलिक प्रबंधक, कृषि जलवायु क्षेत्रीय परियोजना........... (समस्त) की ओर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु अग्रेषित।  

  हस्ताक्षर
संचालक, कृषि अभियांत्रिकी
मध्यप्रदेश, भोपाल
 
कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय
आफिस काम्प्लैक्स बी ब्लाक, गौतम नगर, भोपाल
क्रमांक/के.जी./05/2006-07/टैª.नि.की.बै./2185 भोपाल,                           दिनांक 30.10.06
प्रति

प्रबंध संचालक,
....................................................................
...................................................................(समस्त ट्रेक्टर निर्माता कंपनी)

विषयः- दिनांक 25.09.2006 को ट्रेक्टर निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ संपन्न हुयी बैठक ।

दिनांक 25.09.2006 को माननीय कृषि मंत्री जी की अध्यक्षता में किसानों को अनुदान पर दिये जाने वाले ट्रैक्टरों की कीमतों में कमी की जाने की संभावनाओं के संबंध में ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक संपन्न हुयी।

बैठक में लिये गये निर्णय अनुसार ‘‘कृषकों को कम दाम पर ट्रैक्टर उपलब्ध कराने हेतु ट्रैक्टर निर्माता कंपनियां उनके द्वारा उत्पादित ट्रैक्टर मॉडल की कीमत का प्रस्ताव संचालक, कृषि अभियांत्रिकी को उपलब्ध करावेंगे।

अतः आप संलग्न सूची अनुसार आपसे संबधित ट्रैक्टरों की कीमत का प्रस्ताव तत्काल उपलब्ध करावें, इन्ही दरों पर कृषकों को ट्रैक्टर उपलब्ध कराया जाना होगा। कृपया प्रस्ताव शीघ्रतिशीघ्र उपलब्ध करावें।
संलग्न- सूची 2 पृष्ठ।

  हस्ताक्षर
संचालक, कृषि अभियांत्रिकी
मध्यप्रदेश, भोपाल
 

Registered

No. 13-10/99-My (I&P) Government of India
Ministry of Agriculture
(Deptt. of Agriculture & Cooperation)

Krishi Bhavan, New Delhi - 110001
Dated: 25th September, 2006

To,
  1. Secretary (Agricultrue) (All States/UT's)
  2. Director (Agriculture) (All States/UT's)
  3. Managing Director (All States Agro Industries Corporations)
  4. Director (Agricultural Engineering) (Government of Madhya Pradesh, Tamilnadu and West Bengal)

Subject :-  List of eligible tractors for subsidy under Farm Mechanization Programme through Centrally Sponsored Scheme 'Macro Management of Agriculture Supplementation/Complementation of State's Efforts through Work Plans'

Sir,
    I am directed to refer this Department's letter of even number dated 12th December 2005 vide which the list of tractors delivering up-to 35 HP (Ps) at the rear Power Take Off (PTO) shaft and found eligible for subsidy under the Farm Mechnization Programme through Centrally Sponsored scheme 'Macro Management of Agriculture Supplementation/Complementation of State's Efforts through Work Plans' was circulated.

2.  The above referred list has since been revised in suppression of all previous lists and the copy of the same is enclosed for necessary action, However, the distribution of tractor upto 35 PTO horsepower will be done in accordance with the guidelines issued by the Department earlier, subsidizing tractors up-to 30 PTO HP (Ps)

Encl : as Above Yours faithfully
Sd/- (A.N. MESHRAM) Deputy Commissioner (Machinery
 

LIST OF ELIGIBLE TRACTORS DELIVERING UPTO 35 HORSE POWER (PS)
AT THE REAR POWER TAKE OFF (PTO) SHAFT FOR SUBSIDY

 

Sl. No.

Tractor Make & Model

Max PTO Horse Power (Ps)

Budni Test Report No and
Month of release.

 

 

 

 

1.

Eicher 241 NC

20.5

T-319/695, November 1995

2.

Eicher 242 NC

20.1

T-342/733, May 1997

3.

Eicher 312 NC

28.1

T-375/781, March 1999

4.

Eicher 368

34.0

T-395/809, February 2000

5.

Eicher 312

30.5

T-474/939, May 2003

6.

Eicher 242 Super Star

20.0

T-497/973, July 2004

7.

Swaraj 722 Super

18.5

T-398/818, Jan. 2000

8.

Swaraj 724 FE

22.1

T-413/840, March 2000

9.

Swaraj 733 FE (8+2 speed gear box)

29.2

T-427/871, December 2001

10.

Swaraj 735 FE (8+2)

33.7

T-416/843, May 2001

11.

Swaraj 939 FE

33.6

T-482/954, october 2003

12.

TAFE 30 DI

29.3

T- 281/633, May 1993

13.

MF 1035 DI

33.9

T- 315/690, 1995

14.

TAFE 25 DI

24.1

T- 329/713, July 1996

15

MF 1035

29.4

T-343/735, June 1997

16.

TAFE 30 DI J (Two Cylinder)

26.5

T- 405/826, September 2000

17

TAFE 30 DI J

28.3

T- 408/835, Jan 2001

18

TAFE 1035 S

28.4

T- 409/836, Feb 2001

19

TAFE 2750DI

23.8

T-490/966, March 2004

20

TAFE 30 DI Heavy Duty

30.7

T-502/979, August 2004

21

Escort 325 M (6+2)

22.6

T- 307/676, MArch 1995

22

Escort 335 M DB (6+2)

29.5

T- 320/696, March 1995

23

Escort 430 (6+2)

28.0

T-349/746, Jan 1996

24

Escort 435 (8+2)

32.1

T- 353/751, 1998

25

FARMTRAC 30 (HERO)

33.8

T- 472/937, April 2003

26

HMT 3522

30.6

T- 296/660, 1994

27

HMT 2522

21.9

T-340/729, February 1997

28

HMT 2522 (OS)

21.2

T- 402/822, Aug 2000

29

Mitsubishi Shakti MT 180 D

16.3

T-376/782, March 1999

30

Tempo OX-25

24.7

T-421/849, June 2001

31

Tempo Balwan 400

32.6

T-499/976, August 2004

32

tempo Balwan 300

28.8

T-489/964, February 2004

33

Mahindra 265 DI

31.0

T-299/663, 1994

34

Mahindra B-275 DI

31.7

T-300/664, 1994

35

Mahindra B-275 DI (High Torgue)

34.6

T-387/799, October 1999

36

Mahindra Sactor

19.6

T- 480/952, September 2003

37

Sonalika International 730 DI

24.7

T-493/823, August 2000

38

Sonalika International DI-740

32.2

T-412/839, March 2001

39

Sonalika International Di-35

32.0

T- 428/872, February 2002

40

Sonalika International Di 730 III

28.4

T-452/901, September 2002

41

Sonalika International DI 35 III

34.5

T- 481/953, October 2003

42

L&T John Deere 5103 (Collar Shift)

33.2

T-422/854, July 2001

43

Indofarm 2040 DI

33.3

T-429/873, February 2002

44

Indofarm 2030 DI

27.7

T-494/970, March 2004

45

Indofarm 2035 DI

32.0

T-493/969, March 2004

46

Captain DI 2600 (Min tractor)

Maximum Englne Power 8.8 (PTO Not Provided)

T-470/935, March 2003

47

Trishul MT-625 DI

8.7 engine power (PTO not provided)

T-470/935, March 2003

48

MG-312, MO-DI-5

25.5

T-475/940, May 2003

49

SAME 393

30.4

T-323/703, March 1996

50

New Holland 3030

33.7

T-448/896, August 2002

51

Standard 335

31.8

T-460/917, December 2002

52

Swaraj 824 FE

28.8

T-505/987, October 2004

53

HMT 3022

30.0

T-304/671, February 1995

54

Bajaj Tempo OX-25 (orchard Special)

23.8

T-516/1002, March 2005

55

Eicher 333

34.7

T-523/1009, May 2005

56

L&T John Deere 5103 Economy

32.5

T-522/1008, May 2005

57

SAME 36 DI Euro

32.4

T-529/1016, July 2005

58

Mahindra 235 DI Air Flow

20.67

T-525/1011, June 2005

59

Eicher 242x Trac

19.3

T-532/1019, October 2005

60

Field Marshal FM 625 DI

9.05 engine power (PTO not provided)

T-514/997, Jan 2005 & T-532/1028, Jan 2006 (Supplementary Test)

61

Escort Jawan (MPT)

23.02

T-521/1007, May 2005

62

Shaktiman MG-312

26.2

T-533/1020, Oct 2005

63

Powertrac 434

33.85

T-538/1025, Dec 2005

64

Powertrac 439

34.8

T- 541/1030, Jan 2006

65

Powertrac 434 XL

31.4

T-543/1032, Feb 2006

66

Standard 330

27.06

T-544/1033, March 2006

67

Powertrac 439XL

34.0

T-547/1038, May 2006

68

Angad 240 D

17.5

T-546/1037, April 2006

69

Mahindra 245 DI 2 PC

23.9

T-549/1040, June 2006

70

Mahindra 255 DI

21.9

T-390/802, Novembr 1999

Sd/- (A.N. Meshram)
Deputy Commissioner (My)

Copy To-

1. Shri S.K. Patra
General Manager (Farm Sector)
National Bank of Agriculture & Rural Development (NABARD)
Plot No C-24, G Block, Bandra Kurla Complex, Post Box No. 8121,
Bandra (East), Mumbai- 400051

2. Under Secretary (AE I),
Ministry of Heavy Industry and Public Enterprises,
Deptt. of Heavy Industry, Udhyog Bhavan
NEW Delhi - 110011

3. President
Tractor Manufacturer's Association

4. Director
Farm Machinery Training & Testing Institute
Budni (MP), Hissar (Haryana), Garladinne (A.P.), Biswanath Chariali (Assam)

5. Concerned Tractor Manufacturers

6. JS (P&P)

 

पावर टिलर, के अनुमोदत मेक की सूची

क्रमांक पावर टिलर का मेक एवं माडल
1   KAMCO KMB 200
2   VST Shakti 130 DI
3   MITSUBISHI SHAKTI CT 85 with VWH-120 Engine
4   GREAVES GS 15L
5   SHRACHI SF 12
6   KHAZANA

1. दि. 03 जून 2005 को (2) मेक मॉडल के पावर टिलर अनुदान योजना में सम्मिलित किये गये।

(7) Tex Maco Dhanwan
(8) Ganga Sifang GN-121-15

2. दिनांक 22/11/05 को (2) मेक-मॉडल  के पावर टिलर अनुदान योजना में और सम्मिलित किये गयें। इस प्रकार अब 10 मेक मॉडल के पाॅवर टिलर अनुदान योजना में सम्मिलित है।

(9) Greaves GS-15 DIL (भारत सरकार का पत्र दि. 6 जून 05)
(10) Souza Sifang GN 121-(15)  (भारत सरकार का पत्र क्र. 3 अक्टुबर 05)

  हस्ताक्षर
संचालक,
कृषि अभियांत्रिकी
 
कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय
आफिस काम्प्लैक्स बी ब्लाक, गौतम नगर, भोपाल
क्रमांक/के.जी./8/2008/पार्ट-2/95 भोपाल,                                         दिनांक 17.1.07

प्रति

  1. उपसंचालक कृषि (समस्त)
  2. कृषि यंत्री / कार्यपालन यंत्री, (समस्त)
  3. सहायक कृषि यंत्री / मुख्य निर्देशक (समस्त)

विषयः-  कृषि यंत्रों की गुणवत्ता के सम्बन्ध में।

संदर्भः- भारत सरकार, कृषि मंत्रालय का पत्र क्रमांक/12-10/2005-माय. (ए.आई) दिनांक 11.7. 2005

कृपया भारत सरकार कृषि मंत्रालय के उक्त संन्दर्भित पत्र की छाया प्रति संलग्न का अवलोकन करें जिसमें निर्देश दिये गये है कि राशि रूपये 10,000/- से अधिक मूल्य के कृषि यंत्र भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत प्रमाणित संस्था से प्रमाणित होना चाहिए। प्रमाणित यंत्र पर ही मैको मेनेजमेन्ट योजनान्तर्गत “कृषि यंत्रीकरण के प्रोत्साहन” कार्यक्रम अन्तर्गत अनुदान देय हो।

अतः निर्देशित किया जाता है कि आप यह सुनिश्चित करें कि राशि रूपये 10,000/- से अधिक का जो भी कृषि यंत्र अनुदान योजना पर दिया जावे, वह अधिकृत संस्था द्वारा परीक्षण किया गया है अथवा नहीं।

संलग्न उपरोक्तानुसार। हस्ताक्षर
संचालक,
कृषि अभियांत्रिकी
 
क्रमांक/के.जी./8/2008/पार्ट-2/96 भोपाल                                                दिनांक 17.01.07

प्रतिलिपिः-

प्रबंध संचालक, म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास निगम, भोपाल की ओर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु। संलग्नः उपरोक्तानुसार।

  हस्ताक्षर
संचालक, कृषि अभियांत्रिकी
मध्यप्रदेश, भोपाल
 

No.12-10/2005-MY(AI)
Government of India
Ministry of Agriculture
Department of Agriculture & Cooperation

Krishi Bhawan, New Delhi-110 001.
Dated te 11th July, 2005.

To,
      Principal Secretary/Secretary (Agriculture),
      All States/UTs

Subject: Ensuring supply of quality agricultural equipment under Governmental Programmes.

Sir,

       I am to invite your kind attention to the deliberations during the Zonal Kharif Confereneces-2005 and the State Work plan discussions under the Macro Management Scheme and to state that following decisions have been formally taken by the Government of India in connection with supply of agricultural equipment/implements under various Governmental programmes assisted by the Government of India.

(i)  It shall be ensured that only the equipment tested by the Central farm Machinery Training & Testing Institutes (CFMT&Tls) or any other organisation identified by the Central/State Governments are supplied under the Governmental programmes. The equipment costing more than Rs. 10,000/- shall either have BIS certification i.e. bear ISI wuality marking or have undergone testing at any of the FMT&TIs.

(ii) A system of random pre/post despatch checks of agricultural equipment being promoted through Governmental programmes, shall be evolved by the State Government. If the situation warrants, randomly picked up equipment shall be re-tested by the nearest FMT&TI for ascertaining their specifications, performance and quality. Any other institution such as any Department of SAU, any Enginearing College, KVK or any other research institute may be designated by the State Government to undertake such activity

  Yours faithfully
Sd/- (Prem Narain)
Joint Secretary to the Government
 
Copy to Director of Agriculture/Director (Agril. Engg.)/Chief Engineer of the State for information and necessary action.
  Yours faithfully
Sd/- (Prem Narain)
Joint Secretary to the Government
 

GUIDELINES FOR DEMONSTRATION OF AGRICULTURL IMPLEMENTS UNDER CENTRAL SECTOR SCHEME ''DEVELOPMENT OF PROTOTYPES OF INDUSTRIAL DESIGNS OF AGRICULTURAL IMPLEMENTS INCLUDING HORTICULTURAL EQUIPMENTS AND THEIR TRIALS AT FARMERS FIELDS''

 

Demonstration of improved agricultural implements/machines specially the newly developed ones is one of the important instrument for disseminating technology for fast popularization and adoption by the farmers. under the scheme, the front Line Demonstrations would be taken up through ICAR and demonstration through the states Department of Agriculture. SAICs and the other such organizations.

 
2. OBJECTIVES: The objectives of the FLD/ Demonstrations are:

(i)  Testing of efficacy, as well as, popularization of th improved/newly developed agricultural equipment including horticultural equipment at the farmers' fields, under the actual field conditions.

(ii)  Performance and acceptability assessment of the agricultural equipment covered under the programme.

3. BASIC CONSIDERATIONS:

(i) The demonstrations under the Scheme shall be organized under the ICAR system and by State Governments organizations.

(ii) During the demonstrations, the farmers acceptability of the agricultural equipments shall be assessed.

(iii) Each demonstration shall cover a minimum area of 0.40 ha or one hour as the case may be. The demonstration shall be organised in a project area concept. For hilly areas the minimum size of plot be 0.20 ha (0.50 acre).

(iv) The selection of the demonstration site shall be decided in consultation with the Department of Agriculture and State Agricultural Universities of the concerned State. Moreover, the demonstration site should be easily assessable to other farmers of the neighboring villages and extension workers coming from different parts of the district.

(v) The owner of the demonstration site may be a progressive farmer and preferably approachable by other farmers and extension workers.

(vi) The expenditure to be incurred on the purchase of improved/newly developed agricultural equipment/machines by each State Governments/Organisation shall be within the overall sanctioned amount by the Government of India as per the Store Purchase Rules of the respective Government/Organisation.

(vii) The contingency expenditures towards the conduct of demonstrations under the scheme, would be assessed by the respective Government/Organisation and proposal submitted to Government of India for approval in the beginning of each year. The expenditure on demonstration would be met out of the approved funds. At the same time, strict economy measures would need to be taken towards incurring contingency expenditure. However the contingency expenditure per demonstration will not executed as under.

(i) Power operated/self propelled equipment: Rs. 3000/-

(ii) Bullock drawn equipment: Rs. 1500/-

(iii) Manually operated equipment: Rs.1000/- For hilly areas the cost per demonstration shall be 1.5 times the above cost per demonstration.

(viii) The contingency expenditure for each demonstration may include all expenses like transportation of equipment, hiring of tractor, power source and any other miscellaneous expenditure incurred for carrying out the demonstrations.

(ix) The type of agricultural equipment/technology to be demonstrated shall be as per the requirement of the State/Area and shall be decided by the implementing organisation in consultation with the State Agriculturral functionary/State Agricultural universities.

(x) Although, fresh proposals for conduct of demonstration, and the equipment needed for the same would be invited in the beginning of each year, the States, which have not been funded for the purpose, would be 30 given priority over the others. However, expenditure on account of contingency would be granted each year during the plan period.

(xi) Some funds for conduct of demonstration will be kept exclusively for North-eastern States for popularisation of improved agricultural implements.

(xii) With a view to extending benefits of the scheme to the maximum number of farmers and maximum number of States, the improved agricultural imkplements/machines, which are less expensive and important for particular States, would be covered under the Scheme.

4. IMPLEMENTATION:

(i) All the demonstrations may be carried out under close supervision of the Technical Officer, Incharge of the demonstration and he shall record observations of all important events so that the same could form a feed back for the State, Central Government and the research organisation.

 (ii) The concerned technical officer shall keep records of various expenses incurred for the demonstration.

(iii) When the demonstrations are completed, analysis shall be made to bring out cost analysis and benefits of improved technology over the previous/traditional technology.

(iv) No expenditure will be met from the scheme on recruitment of staff, purchase of tractor, computer, video camera and any other such asset.

(v) The scheme has been sanctioned for the Ninth plan period during which Government of India would continue to funance release the funds. However, in the event of discontinuance of the Central Sector Scheme during the Tenth plan period and in case of the need of the State for conducting such demonstrations further, the edpendlture will be met by the respective State Governments.

(vi) State Government will ensure to complete the targeted number of demonstrations fixed for the year.

(vii) The expenditure towards repair and maintenance of implements/machines under the scheme shall be brone by the concerned State Government/Organistion and/or from the contingency amount.

(viii) Procurement of implements/macines under the scheme will be made by the concerned State Government/Organisation as per its prevailing Financial/Store purchase Rules.

(ix) The implements/machines procured under the scheme will be a part of inventory of the State Government/Organisation and necessary store purchase procedures/rules will be strictly followed in this regard.

(x) The Annual Audited Statement of account together with he certificate of actual utilisation of the grants received by the State Government/Organisation shall be submitted to the Department of Agriculture & Cooperation within one month of the expirty of the expirty of the financial year i.e. 30th April of the subsequent year.

5. SUPERVISION:

(i) The results of the demonstration shall be properly documented reported, circulated to all the concerned in the State Department of Agriculture and in the Government of India.

(ii) A Commitee under the chairmanship of Director (Agriculture) of concerned State shall be constituted for close monitoring, supervision and analysis etc. of the demonstration, programme taken up.

(iii) The organisation concerned would ensure effective implementation and supervision of the Scheme by the officers specially designated at the State and District level. The Officers from Farm Machinery Training and testing Institute at Budni (M.P.), Hissar (Haryana), Garlandinne (A.P.), Biswanath Chariali (Assam) and the officers from the Ministry of Agriculture shall be undertaking random visits to see the actual demonstration and assess the performance.

(iv) The success story of demonstration of improved agricultural implements may be published in popular journals/periodicals for the benefits of other farmers in their State and for the farmers of the other States.

 

Annexure-1

DEPARTMENT OF AGRICULTURE & COOPERATION
(Machinery Division)
Krishi Bhawan, New Delhi-110 001

Name of State/Organisation:
Deptt:
Date:

A. New AgricultaralEquipment proposed for purchase & Demonstrations

B. (Rupees)

S.No. Name of Equipment No. of Demonstrations Contingency* for each equipment expenditure for to be conducted demonstration during (a) Equipment already purchased 2006-07 2007-08 2006- 07 2006-07 Out of previous releascs 1. 2. 3. (b) New equipment as listed at 'A' Above

S.N. Name of Equipment No proposed to be procured Rate Cost During 2006-07
1        
2        
        Total Cost -
 
 B. Contingency Expenditure
S.N. Name of Equipment Contingency* No. of Demonstrations for each equipment Expenditure for Demonstration
1      
2      
3      
  A. Equipment already purchased
SR. During 2006-07 During 2007-08 Out of previous releascs
1      
2      
3      
B.  New equipment as listed at 'A' Above
SR. During 2006-07 During 2007-08 Out of previous releascs
1      
2      
3      
C. Total budget required (Cost of Equipment+Contingency)
During the year 2006-07 & for 2007-08 (A+B).................... Grand Total
   
D. Justification for selecting the equipment for demonstration.

E. Districts, in which the demonstrations are proposed to be conducted.

(Signature)

Note
(i) *The detailed break up of contingency expenditure for each equipment may be worked out as per guide lines and given on separate sheet.
(ii) Physical & financial progress as well as Utilisation Certificate with regard to tth funds relesased, if any, under the scheme during 2004-05 & 2005-06 may kindly be appended in the enclosed proforma.
 

Annexure-II

Proforma for quarterly physical and financial progress of the scheme 'Demonstration of Newly Developed Agricultural Equipments lncluding Horticultural Equipments at Farmers Field.' Return for the period 2004-05 & 2005-06 (for each year on a separate sheet)

1. Name of the State:

2. Budget allocation for the year:

3. Amount released:

4. Amount utilized:

5. Details of demonstration conducted:

Sl.No. Name of Equipment No. of Demonstration Area Covered (ha) Places of demonstration No. of farmers Participated
1          
2          
3          
6. Assessment of the State/Organisation on impact of the Scheme in terms of sequential benefits accrued to the farmers and the number of equipment adopted by them:

Singature.............................

Name..................................

Designation.........................

Address...............................

Telephone No.......................

 

Annexure-III

FORM GER 19-A
(See Government of India's Decision (i)below Rule 150)

From of Utilisation Certificate

Sl. No. Letter No. and Date Amount  
     

Certfied that out of Rs....................of grants -inaid sanctioned during the year...........................in favour of .............................under this Ministry/Department letter No. given in the margin and Rs....................on account of unspent balance of the previous year, a sum of Rs.....................has been utilised for the perpose of ..........................For which it was sanctioned and that the balance of Rs......................remaining unutilised at the end of the year has been surrendered to Government (Vide No..................dated.................)/will be adjusted towards the grant in aid payable during the next year...........................

 

Total : -

   

2. Certified that I have satisfied my self that the conditions on which the grants-in-aid was sanctioned have been duly fulfiled/are being fulfilled and that I have exercised the following the following checks to see that the money was actually utilised for the purpose for which it was sanctioned.

Kinds of checks exercised.
1.
2.
3.
4.

Signature ....................
Designation...................
Date...................

 

मध्यप्रदेश शासन
कृषि विभाग
मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल
अधिसूचना

भोपाल, दि. 14 फरवरी, 2006

          क्रमांक डी-7/22/97/14-3: मध्यप्रदेश ट्रेक्टर द्वारा खेती (प्रभारों की वसूली) अधिनियम 1972 (क्रमांक 9 सन् 1973) की धारा 7 द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार, एतद्द्वारा, मध्यप्रदेश ट्रैक्टर द्वारा खेती (प्रभारों की वसूली) नियम, 1981 में निम्नलिखित और संशोधन करती है अर्थातः-

संशोधन

   उक्त नियमों में, नियम 7 के स्थान पर, निम्मलिखत नियम स्थापित किया जाए, अर्थात्:-
          “7 ट्रेक्टर द्वारा की गई खेती संबंधी प्रभारी का मापमान - ट्रेक्टर द्वारा की गई खेती संबंधी प्रभारी का मापमान निम्नानुसार होगा।

(क) डाजिग या सम्बद्ध कार्य , जो विभिन्न अश्वशवित के उन ट्रैक्टरों द्वारा जो कि बुलडोजिग अटेचमेन्ट से युक्त हो किया जाना हो:-

80 अश्वशक्ति तथा उससे अधिक अश्वशक्ति के ट्रेक्टर हनोमेग के -7 रू. 650/- प्रतिघंटा
  भारत डी-50 रू. 800/- प्रतिघंटा
  कैट डी-6 रू. 800/- प्रतिघंटा
(ख) जुताई कार्य जो प्लाइग अटेचमेंट से यूक्त ट्रैक्टरों द्वारा किया जाना हों:-
 

1.

खेती की गई भूमि के लिए रू 2250/-प्रति हैक्टर या रू. 900 /-प्रति एकड़

2.

पडत भूमि के लिए उपरोक्तानुसार

(ग) परिवहन कार्य को छोडकर समस्त कृषि कार्य , जो विभिन्न अश्वशक्ति के व्हील टाइप ट्रैक्टरों द्वारा किया जाना हो:-
 

1. 40 अश्वशक्ति तक के ट्रेक्टर रू. 180/- प्रति घंटा
2. 41 अश्वशक्ति या उससे अधिक अश्वशक्ति के ट्रेक्टर रू. 260/- प्रति घंटा

(घ) डोजिंग या सम्बद्व कार्य, जो विभिन्न अश्वशक्ति के उन ट्रैक्टरों द्वारा जो कि बुलडोजिग अटैचमेंट से युक्त हो कृषि भिन्न प्रयोजनों के लिए किया जाना हों -
 

80 अश्वशक्ति तथा उससे अधिक अश्वशक्ति के ट्रेक्टर हनोमेग के -7 रू. 800/- प्रतिघंटा
  भारत डी-50 रू. 900/- प्रतिघंटा
  कैट डी-6 रू. 900/- प्रतिघंटा

(ड.) परिवहन कार्य:-

1. 40 अश्वशक्ति तक के व्हील टाइप ट्रेक्टर रू 4/-प्रति किलोमीटर
2. 41 अश्वशक्ति या उससे अधिक अश्वशक्ति के व्हील टाइप ट्रेक्टर रू 5/-प्रति किलोमीटर

2. यह संशोधन 1.4.2006 से प्रवृत्त होगा।

 

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार
हस्ताक्षर
(डॉ. एम.बी.एस. भदोरिया)
उप सचिव
म.प्र. शासन . कृषि विभाग

 
क्रमांक डी-7/22/97/14.3 भोपाल                                             दिनांक 14 फरवरी 2006

भारत के सविधान के अनुच्छेद 348 के खण्ड (3) के अनुसरण में इस विभाग की समसंख्यक अधिसूचना दिनांक 14.02 2006 का अग्रेजी अनुवाद राज्यपाल के प्राधिकार से एतद् द्वारा प्रकाशित किया जाता है।

 

हस्ताक्षर
उप सचिव
म.प्र.शासन ,

 

मध्यप्रदेश शासन
कृषि विभाग
मंत्रालय

विषय:- नलकूपों की यील्ड टेस्टिंग के संबंध में दिनांक 6.12.06 को ओयोजित बैठक का कार्यवाही विवरण।

   दिनांक 6.12.06 को सचिव कृषि की अध्यक्षता में नलकूपों की यील्ड टेस्टिंग की व्यवस्था संबंध में बैठक आयोजित की गईं। संचालक कृषि, संचालक कृषि अभियांत्रिकी के प्रतिनिधि एवं प्रबंध संचालक म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास निगम
के प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित हुये । वर्तमान व्यवस्था में अनुभव की जा रही कठिनाइयांे व कृषको को हो रही असुविधा को देखते हुये वेकल्पिक व्यवस्थ पर चर्चा हुई।
बैठक में चर्चा उपरान्त निर्णय लिया गया कि -

1. यील्ड टेस्ट नलकूप खनन के पूर्ण होने पर ही किया जायेगा।
2. कृषकों द्वारा नलकूप खनन करने के उपरान्त कृषक द्वारा लगाये गये पम्प से यील्ड टेस्ट का कार्य अनुविभागीय कुषि अधिकारी एवं म.प्र. राज्य कृषि उद्योग विकास निगम अथवा कृषि अभियांत्रिकी के उपस्थिति में कराया जायेगा।
3. इनकें प्रतिवेदन एव अनुशंसा के आधार पर उप संचालक कृषि द्वारा अनुदान स्वीकृत किया जायेगा।
4. प्रत्येक विकास खंड में संचालक कृषि द्वारा इस हेतु ट.छव्जबी उपलब्ध कराये जायेगें।

 

हस्ताक्षर
(एस. के उपाध्याय)
उप सचिव
मध्यप्रदेश शासन कृषि विभाग
भोपाल दिनांक 12.12.06

प्रतिलिपि:-
1. संचालक कृषि / कृषि अभियांत्रिक म.प्र. भोपाल ।
2. प्रबंध संचालक म.प्र. राज्य कृषि उघोग विकास निगम।

 

हस्ताक्षर
उप सचिव
मध्यप्रदेश शासन कृषि विभाग

 

मध्यप्रदेश शासन,
कृषि विभाग
मंत्रालय, भोपाल

क्रमांक/डी/17/9/94/14-3 भोपाल:                                               दिनांक 31 दिसंम्बर 2001
प्रति,
    संचालक कृषि
    मध्यप्रदेश, भोपाल

विषयः- कृषकों द्वारा खोदे गये नलकूपों पर अनुदान की योजना

उपरोक्त विषय के संदर्भ में इस विभाग के आदेश क्रमांक/डी-17/2/85/14-3 दिनांक 9.4.92 द्वारा कृषि विभाग के अन्तर्गत अशासकीय ऐजेन्सी/ठेकेदारों द्वारा खोदे गये नलकूप पर अनुदान की योजना के संबंध में जारी किये गये निर्देशों को निरस्त करते हुये निम्नानुसार व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की जाती है:-

1. सिंचाई नलकूप खनन पर अनुदान योजना का क्रियान्वयन अब केवल कृषि विभाग द्वारा किया जावेगा। योजना के अन्तर्गत देय अनुदान केवल अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों को निम्न दरों पर देय होगा:-
 

(अ) नलकूप खनन, विकास तथा निर्माण के लिये। --- लागत का 75 अथवा रूपये 15,000/- में जो भी कम हो।
(ब) सबमर्सिबल पंप एवं सहायक सामग्री के लिये। --- कीमत का 75 या रूपये 10,000/- में जो भी कम हो।

2. अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के वर्ग के उन्ही कृषकों या उनके समूह को अनुदान देय होगा, जिन्होने पूर्व में नलकूप नहीं खोदा है।
3. अनुदान की पात्रता अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कृषकों या उनके समूह को होगी जिन्होनें सहकारी अथवा व्यवसायिक बैंकों से ऋण लिया हो या स्वयं के व्यय से नलकुप खनन किया हो। अनुदान नगद में न दिया जाकर कृषकों के बैंक खातें में ही जमा किया जावेगा।
4. इस आदेश के तहत अनुदान का लाभ उन अनुसूचित जाति एवं जनजाति के कृषकों को देय होगा। जो प्रथम आये प्रथम पाये के आधार पर उप संचालक कृषि के यहां पंजीयन करवाकर योजना का लाभ लेना चाहेंगे। इसके लिये कृषकों को पंजीयन पत्र प्रदाय किया जायेगा।
5. नलकूप का स्थल चयन, संभावित जल उपलब्धता एवं संभावित गहराई सम्बन्धी जांच हेतु नलकुप खनन के पूर्व “रेजिस्टीविटी सर्वे” करना आवश्यक होगा। रेजिस्टीविटी 40 सर्वे जल संसाधन विभाग में पंजीकृत निजी संस्थाओं से कृषक द्वारा स्वयं कराया जावेगा। रेजिस्टीविटी सर्वे की रिपोर्ट सम्बन्धित उप संचालक कृषि के पास जमा कराई जावेगी। रेजिस्टीविटी सर्वे में यदि यह पाया जाता है कि स्थल पर जल की उपलब्धता नहींे है तो सम्बन्धित कृषक का पंजीयन उप संचालक कृषि द्वारा निरस्त कर दिया जावेगा।
6. नलकूप की सफलता एवं नलकूप में जल उपलब्धता की मात्रा उसकी गोलाई एवं गहराई का पंचनामा एक समिति द्वारा किया जावेगा जिसके सदस्य निम्नानुसार होगेः-
(अ) अनुविभागीय अधिकारी कृषि या उनके द्वारा मनोनित प्रतिनिधि
(ब) सहायक कृषि यंत्री या उनके द्वारा मनोनीत यांत्रिक सहायक अथवा मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम के शाखा प्रबंधक
(स) कृषक हितग्राही
(द) ग्राम पंचायत का सरपंच समिति के सदस्यों की उपस्थिति में स्थल पर जांच पश्चात पंचनामा बनाया जावेगा। समिति के सदस्यों को स्थल पर ले जाना एवं उनकी उपस्थिति में यील्ड टेस्टिंग कराने का उत्तरदायित्व अनुविभागीय अधिकारी कृषि का होगा।
7. नलकूप की जल क्षमता का परीक्षण (यील्ड टेस्टिंग) कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय/म.प्र.राज्य कृषि उद्योग विकास निगम के पास उपलब्ध मशीनो से शासन द्वारा निर्धारित दरों पर हितग्राहियों से अग्रिम प्राप्त कर किया जावेगा। यील्ड टेस्टिंग अग्रिम जमा होने के एक माह के भीतर किया जाना अनिवार्य होगा।
8. यील्ड टेस्टिंग का कार्य 340 सी.एफ.एम. की क्षमता की मशीन से 4 घंटा एवं इससे कम क्षमता की मशीन से 6 घंटा तक किया जावेगा। यील्ड टेस्टिंग में स्टेटिक वाटर लेबल, ड्रा डाऊन एवं एक नलकूप से दूसरे नलकुप की दूरी आवश्यक रूप से देखी जावेगी। यील्ड टेस्टिंग के प्रमाण पत्र पर सभी सदस्यों के हस्ताक्षर प्राप्त कर संबंधित संस्था, जिसके द्वारा यील्ड टेस्टिंग हेतु मशीन भेजी गयी है, के द्वारा उप संचालक कृषि को भेजे जावेंगे एवं इसकी प्रति कार्यालय में संधारित होगी।
9. एक नलकूप से दूसरे के बीच की न्यूनतम दूरी एल्युवियम क्षेत्र में 450 मीटर एवं चट्टानी क्षेत्र में 300 मीटर रहेगी। 10. नलकूप की न्युनतम गहराई एल्युमिनियम क्षेत्र मे 45 मीटर एवं चट्टानी क्षेत्र में 60 मीटर होगी।
11. एल्युमिनियम क्षेत्र में 4000 गैलन प्रतिघंटा एवं चट्टानी क्षेत्र में 2000 गैलन प्रतिघंटा न्यूनतम डिस्चार्ज होने पर नलकूप सफल माना जावेगा।
12. असफल नलकूप के लिये यील्ड टेस्टिंग आवयक नहीं होगा। विभाग के द्वारा नलकूप खनन की अनुमति दिये जाने के पश्चात् कृषक द्वारा नलकूप खनन घोषित करने के लिए आवेदन कर सकता है, जिसकी प्रक्रिया निम्नानुसार होगीः-
(I) कृषक के द्वारा नलकूप खनन कर लेने के पश्चात असफल घोषित करने के लिये आवेदन-पत्र अनुविभागीय अधिकारी कृषि को संबंधित विकासखंड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से प्रस्तुत किया जावेगा, जिसमें स्पष्ट उल्लेख होगा कि बोर में पर्याप्त पानी नहीं हैं एवं कृषक इसे असफल मान्य करता है।
(II) वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आवेदन पत्र प्राप्त होने पर 7 दिनों के भीतर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर तथ्यों का परीक्षण कर आवेदन-पत्र अनुविभागीय अधिकारी कृषि को प्रस्तुत करेंगे।
(III) अनुविभागीय अधिकारी कृषि, यील्ड टेस्टिंग के लिये गठित समिति के सदस्यों के साथ आवेदन प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर कृषक को पूर्व सूचना देकर स्थल का निरीक्षण करेंगे। समिति के सदस्य निरीक्षण के दौरान निम्न तथ्यों की जांच कर उसका उल्लेख प्रतिवेदन में करेंगे:-
(अ) खोदे गये नलकूप की दूसरे नलकूपों से दूरी।
(ब) नलकूप की गोलाई।
(स) नलकूप की गहराई।
(द) गोलाई, गहराई एवं केंसिंग पाईप के आधार पर खोदे गये नलकूप की अनुमानित लागत।
(IV) समिति द्वारा यह संतुष्टि की जाना आवश्यक होगी कि नलकूप पर्याप्त गहराई तक खोदा गया है व उसके बावजूद उसमें पर्याप्त पानी नहीं निकला है।
(V) यदि दूसरे नलकूप से मापदण्ड से कम दूरी पाई जावे तो प्रकरण निरस्त कर दिया जावेगा।
(VI) यदि समिति संतुष्ट होती है कि नलकूप निर्धारित मापदण्ड के अनुसार खोदा गया है तथा उसमें पर्याप्त पानी नहीं निकला है तो उसको असफल घोषित कर प्रकरण उप संचालक कृषि को अनुदान प्रदाय करने के लिए प्रस्तुत किया जावेगा।
(VII) असफल नलकूप पर उसकी वास्तविकता लागत का 75 प्रतिशत अधिकतम रूपयें 15,000/- का अनुदान देय होगा।
(VIII) इस प्रकार के नलकूपों के प्रकरण निपटाने की जिम्मेदारी अनुविभागीय अधिकारी कृषि की होगी जो समिति के अन्य सदस्यों को एकत्रित कर स्थल निरीक्षण करावायेंगे तथा अन्य प्रक्रिया पूर्ण करवाकर प्रकरण आगामी कार्यवाही हेतु उप संचालक कृषि को भेजेंगें।
(IX) असफल नलकूप के अन्तर्गत यील्ड टेस्टिंग किया जाना आवश्यक नहीं है अतः नलकूप परीक्षण हेतु कृषक से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जावेगा।
(X) नलकूप को असफल घोषित करने बाबत् समिति द्वारा दिये जाने वाले प्रमाण-पत्र का प्रारूप भी संलग्न है।
(XI) जो कृषक नलकूप का यील्ड टेस्टिंग कराना चाहते हैं उनसे नियमानुसार अग्रिम राशि जमा कराई जाकर कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय/कृषि उद्योग विकास निगम की मशीनों से यील्ड टेस्टिंग कराया जावेगा।

13. विद्युत कनेक्शन प्राप्त कर नलकूप चालू करने की जिम्मेदारी कृषक की होगी। जल उपलब्धता संबंधी समिति द्वारा दिया गया प्रमाण-पत्र विद्युत कनेक्शन हेतु मान्य किया जावेगा।
14. कृषकों द्वारा अपनी पसंद का आई.एस.आई.मार्क वाला पंप, कृषि उद्योग विकास निगम अथवा मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संद्य अथवा निजी विक्रेताओं से क्रय किया जा सकेगा।
15. कृषक अपनी इच्छानुसार किसी भी संस्था अथवा ठेकेदारों से नलकूप खनन करा सकेंगे अर्थात उप संचालक कृषि द्वारा किसी भी ठेकेदारों को नलकुप खनन हेतु आदेश देने की आवश्यकता नहीं, यह कार्य कृषक को स्वयं कराना होगा। 16. नलकूप खनन की दरों का निर्धारण उप संचालक कृषि के प्रस्ताव पर जिला योजना समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष के प्रारंभ में किया जावेगा।

संलग्नः- उपरोक्तानुसार-1

मध्यप्रदेश के राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार हस्ताक्षर
(एस.एन.शर्मा)
उप सचिव
मध्यप्रदेश शासन, कृषि विभाग

 
क्रमांक/डी./17/9/94/14-3 भोपाल,                                                 दिनांक :

प्रतिलिपि

1. सचिव,म.प्र.शासन,वित्त विभाग भोपाल।
2. सचिव, म.प्र.शासन, आदिम जाति कल्याण, विभाग भोपाल।
3. सचिव,म.प्र.शासन, जल संसाधन विभाग, भोपाल।
4. सचिव, म.प्र. शासन, ग्रामीण विकास विभाग, भोपाल।
5. समस्त संभागायुक्त, म.प्र.।
6. समस्त जिलाध्यक्ष, मध्यप्रदेश।
7. संचालक, कृषि अभियांत्रिकी, म.प्र. भोपाल।
8. समस्त आंचलिक प्रबंधक, कृषि जलवायु क्षेत्र परियोजना, मध्यप्रदेश।
9. समत उप संचालक कृषि, मध्यप्रदेश।
10. उप प्रबंधक, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास निगम भोपाल।
11. प्रबंध सचालक, राज्य सहकारी बैंक, भोपाल।
12. प्रबंध सचालक, भूमि विकास बैंक भोपाल।
13. प्रबंध सचालक, म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ भोपाल।
14. प्रबंध सचालक, म.प्र.राज्य सहकारी विपणन संघ, भोपाल। की ओर सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु अग्रेषित।

  हस्ताक्षर
उप सचिव,
मध्यप्रदेश शासन, कृषि विभाग
 

नलकूप असफल घोषित करने संबंधी प्रमाण-पत्र प्रारूप

1. कृषक का नाम: ........................................................................................
2. ग्राम: ......................................................................................................
3. विकासखंड: ...............................................................................................
4. पंजीयन क्रमांक एवं दिनांक: .........................................................................
5. पंजीयन क्रमांक एवं दिनांक: .........................................................................
6. नलकूप खनन का दिनांक: ............................................................................
7. नलकूप की गोलाई: ......................................................................................
8. नलकूप की गहराई: .......................................................................................
9. केसिंग पाईप की लंबाई: .................................................................................
10. अन्य नलकूपों से दूरी: ..................................................................................

नलकूप की असफलता के संबंध मे समिति का अभिमतः-
कृषक द्वारा दिये गये घोषणा पत्र के अनुसार नलकूप का निरीक्षण किया गया एवं समिति उक्त नलकूप को असफल प्रमाणित करती है।

हस्ता.
कृषक
दिनांक
हस्ता.
सहायक कृषि यंत्री /शाखा प्रबंधक
म.प्र.राज्य कृषि उद्योग
विकास निगम / यांत्रिक सहायक
दिनांक 
हस्ता.
अनुविभागीय अधिकारी कृषि
दिनांक
हस्ता.
सरपंच ग्राम पंचायत
दिनांक
 

जल क्षमता प्रशिक्षण (यील्ड टैस्टिंग)

1. यील्ड टेस्ट रिपोर्ट नम्बर: ......................................................................................................
2. यील्ड टेस्टिंग का प्रकार: ........................................................................................................
3. कृषका का नाम एवं ग्राम: ...................................................................................................... : ..............................................................................................................................................
4. विकास खण्ड एवं जिला: ........................................................................................................
5. गहराई: ................................................................................................................................
6. दूसरे नलकुप से दूरी: ..............................................................................................................

दिनांक मशीन के कुल कार्य घंटे स्टेटिक वाटर लेबल ड्रा डाऊन पानी की मात्रा रिमार्क
           
           
हस्ता.
कृषक
दिनांक
हस्ता.
सहायक कृषि यंत्री /शाखा प्रबंधक
म.प्र.राज्य कृषि उद्योग
विकास निगम / यांत्रिक सहायक
दिनांक 
हस्ता.
अनुविभागीय अधिकारी कृषि
दिनांक
हस्ता.
सरपंच ग्राम पंचायत
दिनांक
 

मध्यप्रदेश शासन
कृषि विभाग
मंत्रालय

क्रमांक डी-17-14/95/14-3 भोपाल                                             दिनांक 29 नवम्बर, 2006
प्रति,
1.  कलेक्टर सह अध्यक्ष
    जिला माइक्रो इरीगेशन कमेटी,
    जिला-
2.  मुख्य कार्यपालन अधिकारी,
    जिला पंचायत
    जिला
3.  उपसंचालक कृषि,
    सदस्य सचिव,
    जिला माइक्रों इरीगेशन कमेटी,
    जिला-
विषयः- विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत स्प्रिकंलर, ड्रिप, सिंचाई पम्पों, कृषि उपकरणों तथा कृषि यंत्रों पर अनुदान व्यवस्था में परिवर्तन करने बाबत्।
संदर्भः
1. इस विभाग का ज्ञाप क्रमांक-बी-1-5/93/14-2, दिनांक 26.04.1999
2. इस विभाग का ज्ञाप क्रमांक-बी-8/15/2001/14-2, दि. 10.10.2001
3. इस विभाग का ज्ञाप क्रमांक-डी-17-14/95/14-3 दि. 06 मार्च, 2002

2. उपरोक्त ज्ञाप क्रमांक-1 की कंडिका क्रमांक-8.3.2, 8.4.2 एवं ज्ञाप क्रमांक-2 की कंडिका क्रमांक-8.5.1, 8.5.2, 8.6.3, 8.7.2 में दिये गये मार्गदर्शी निर्देशों को एतद् द्वारा निरस्त कर निम्नानुसार प्रक्रिया अंर्तस्थापित की जाती हैः- योजना के अंतर्गत हितग्राही का चयन एवं अनुदान भुगतान व्यवस्था-
(1.) कृषि विभाग की विभिन्न अनुदान योजना के तहत जिलावार लक्ष्य संचालनालय स्तर से जिलों को भेजा जायेगा। जिला स्तर पर यह लक्ष्य विकासखण्डवार जिला पंचायत द्वारा पूर्व निर्धारित प्रक्रिया अनुसार विभाजित किया जावेगा। (2.) जिला पंचायत द्वारा अनुमोदित लक्ष्य की जानकारी कृषि द्वारा सभी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों व विभागीय अमले को दी जायेगी।
(3.) कृषि विभाग कें क्षेत्रीय अमले द्वारा विकास खंड स्तर पर विभिन्न वर्गो के हितग्राहियों की सूची लक्ष्य की तुलना में डेढ गुना की संख्या मे तैयार की जायेगी। इस सूची का अनुमोदन जनपद पंचायत की कृषि स्थायी समिति द्वारा किया जायेगा। अनुमोदित सूची उपसंचालक कृषि स्थायी समिति द्वारा किया जायेगा। अनुमोदित सूची उपसंचालक कृषि को भेजी जायेगी।
(4.) जिला स्तर पर पूर्व से गठित पाइक्रो इरीगेशन समिति में विकासखंड से प्राप्त सूची की अंतिम अनुमोदन होगा एवं हितग्राहियों को इसकी लिखित सूचना दी जायेगी। यह सूची जनपद पंचायत को दी जायेगी।
(5.) सूचना हितग्राही जिलों में पूर्व से सूचीबद्ध किये गये अधिकृत कम्पनी डीलर से अपनी इच्छानुसार स्प्रिकलर, ड्रिप सिंचाई पम्प, कृषि उपकरणों तथा अन्य कृषि यंत्रों का स्वयं पूर्ण भुगतान करने पर क्रय कर सकेंगें।
(6.) हितग्राही द्वारा विभिन्न योजनान्तर्गत इनका स्वयं क्रय किया जायेगा। क्रय कर्ताओं द्वारा बाजार में प्रचलित दर पर क्रय किया जायेगा। इनकी दरों के निर्धारण में विभाग की कोई भूमिका नहीं रहेगी।
(7.) हितग्राही द्वारा भुगतान किये पक्के बिल की मूल प्रति तथा क्रय प्रमाण पत्र विकासखंड स्तर पर कृषि विभाग को प्रस्तुत किया जावेगा। कृषि विभाग का विकासखंड स्तरीय अमला सिस्टम की स्थापना व चालू होने का भौतिक सत्यापन करेगा एवं अनुदान राशि हितग्राही को देने की अनुशंसा उपसंचालक कृषि का करेगा। बिना भौतिक सत्यापन के अनुदान की अनुशंसा नहीं की जायेगी।
(8.) जिला स्तर पर उपसंचालक द्वारा विकासखंड स्तर से प्राप्त अनुदान अनुशंसा सूची अनुसार अधिकतम 30 कार्यदिवस के भीतर हितग्राही के नाम चेक द्वारा अनुदान हितग्राही के पक्ष मे जारी किया जायेगा। यदि किसी विशेष कारण से यह अनुदान 30 कार्यदिवस के भीतर जारी नहीं किया जाता है तो उपसंचालक हितग्राही को भुगतान करते समय विलम्ब के कारणों को लिखित रूप से उसे सूचित करेगा।
(9.) हितग्राहियों द्वारा क्रय की गई सामग्रियों में से 10 प्रतिशत सामग्री का रेन्डम आधार पर सत्यापन उपसंचालक कृषि के द्वारा तथा 25 प्रतिशत सत्यापन अनुविभागीय कृषि अधिकारी के द्वारा किया जायेगा।
(10.) जिले के अंतर्गत कम्पनियों का पंजीयन एवं उनके अधिकृत डीलर की जानकारी तथा मानक का निर्धारण आदि जिला स्तर पर उपसंचालक कृषि के द्वारा किया जावेगा।
3. वर्तमान निर्देशों के अंतर्गत केवल अनुदान भुगतान करने की व्यवस्था में परिवर्तन किया जा रहा है। कृषि यंत्रों की गुणवत्ता का निर्धारण, मुल्यांकन एवं निरीक्षण आदि के संबंध में जारी पूर्ववर्ती व्यवस्था यथावत लागू रहेगी।

 

हस्ताक्षर
(प्रवेश शर्मा)
सचिव
मध्यप्रदेश शासन, कृषि विभाग

 
पृ. क्रमांक-डी-17-14/95/14-3 भोपाल                                               दिनांक नवम्बर 2006
प्रतिलिपिः-
1. संचालक कृषि/कृषि अभियांत्रिकी,मध्यप्रदेश, भोपाल
2. प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम मार्कफेड, भोपाल
 

हस्ताक्षर
सचिव
मध्यप्रदेश शासन, कृषि विभाग